हरियाणा निकाय चुनाव में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन न कर पाने पर कांग्रेस पार्टी शुक्रवार को यमुनानगर के जगाधरी में आत्ममंथन बैठक आयोजित करने जा रही है।

यमुनानगर। हरियाणा निकाय चुनाव में संगठन के गठन के बावजूद मिली करारी हार के बाद अब कांग्रेस पार्टी सक्रिय हो गई है। हार के कारणों का पता लगाने और आगे की रणनीति तय करने के लिए कांग्रेस शुक्रवार को यमुनानगर के जगाधरी में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित करने जा रही है। इस बैठक की अध्यक्षता हरियाणा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह करेंगे। बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ सभी संगठनात्मक जिलों के जिलाध्यक्षों को अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के निर्देश जारी किए गए हैं। पार्टी नेतृत्व इस बैठक के माध्यम से यह समझने की कोशिश करेगा कि आखिर संगठन की मजबूती के दावों के बीच जमीनी स्तर पर पार्टी के पैर क्यों उखड़ गए।

वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में होगा हार का पोस्टमार्टम

जगाधरी में होने वाली इस बैठक के लिए नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा सहित कई अन्य वरिष्ठ कांग्रेसी नेताओं को भी आमंत्रित किया गया है। चुनाव परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि भाजपा के विजय रथ को रोकने में कांग्रेस कई मोर्चों पर विफल रही है। सबसे ज्यादा चिंता का विषय ‘सांपला नगर पालिका’ के परिणाम रहे हैं, जिसे कांग्रेस का गढ़ माना जाता था, लेकिन वहां भी भाजपा ने सेंध लगा दी। इसके अलावा पंचकूला, अंबाला और सोनीपत जैसे प्रमुख नगर निगमों में भी पार्टी का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। कई सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने कांग्रेस से बेहतर प्रदर्शन किया है, जिसने पार्टी की ‘विकल्प’ बनने की साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जिलाध्यक्षों के रिपोर्ट कार्ड पर टिकी नजरें

बैठक के दौरान सभी जिलाध्यक्षों के रिपोर्ट कार्ड को बारीकी से परखा जाएगा। पार्टी आलाकमान की ओर से जिलाध्यक्षों से कड़े सवाल पूछे जाने की संभावना है कि उनके कार्यकाल के दौरान संगठन की गतिविधियां क्या रहीं। विशेष रूप से उन जिलों के अध्यक्षों को जवाब देना होगा जहां पार्टी का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा या जहां निर्दलीय उम्मीदवार कांग्रेस पर भारी पड़े। जिन जिलों में चुनाव नहीं थे, वहां के जिलाध्यक्षों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की जाएगी। माना जा रहा है कि जो जिलाध्यक्ष अपनी जिम्मेदारी निभाने में लगातार कमजोर साबित हो रहे हैं, उन्हें पद से हटाकर किसी अन्य जिम्मेदारी पर भेजने की सिफारिश की जा सकती है।

भविष्य की चुनौतियों पर रहेगी पार्टी की नजर

निकाय चुनाव के परिणाम कांग्रेस के लिए एक चेतावनी की तरह आए हैं। पार्टी के भीतर इस बात पर विचार-विमर्श किया जाएगा कि कैसे संगठन को फिर से जीवित किया जाए और जनता के बीच अपनी पैठ दोबारा बनाई जाए। बैठक में हार के तकनीकी और राजनीतिक कारणों पर चर्चा के साथ-साथ आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर सांगठनिक बदलावों की संभावनाओं को भी टटोला जाएगा। वर्तमान स्थिति को देखते हुए कांग्रेस अब अपनी रणनीति में बड़े बदलाव करने की तैयारी में है ताकि भविष्य की चुनौतियों का सामना मजबूती से किया जा सके।