कुमार इंदर, जबलपुर। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने मोटर व्हीकल एक्ट (Motor Vehicle Act) में किए गए संशोधन को चुनौती देने वाली याचिका पर बेहद सख्त रुख अपनाया है। देश और प्रदेश में लगातार बढ़ती ट्रैफिक समस्या और ई-रिक्शा चालकों द्वारा नियमों के उल्लंघन के मामले को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना जवाब पेश करने के लिए अंतिम मोहलत दी है। अदालत ने केंद्र सरकार को चार सप्ताह (4 हफ्ते) के भीतर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं।

क्यों दी गई है संशोधन को चुनौती?

नागरिक उपभोक्ता मार्गदर्शक मंच द्वारा दायर इस जनहित याचिका में मोटर व्हीकल एक्ट में केंद्र सरकार द्वारा किए गए कुछ संशोधनों को कटघरे में खड़ा किया गया है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नियमों में ढील और संशोधन के कारण सड़कों पर वाहनों की ‘धमाचौकड़ी’ और अव्यवस्था बेहद बढ़ गई है।

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याचिका में इन निम्नलिखित मुद्दों को उठाया गया

संशोधन के तहत मिली छूट का नाजायज फायदा उठाकर सड़कों पर बिना किसी वैध लाइसेंस के धड़ल्ले से ई-रिक्शा दौड़ाए जा रहे हैं। छूट के चलते नियमों का कोई खौफ नहीं रह गया है, जिसके कारण कई जगहों पर नाबालिग बच्चे भी ई-रिक्शा चलाते हुए मिल रहे हैं, जो आम जनता की जान के लिए बड़ा खतरा है। लगातार बढ़ती गाड़ियों की संख्या और इस वर्ग को मिली विशेष छूट के कारण शहरों की पूरी ट्रैफिक व्यवस्था पटरी से उतर चुकी है।

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छूट वापस लेने की मांग

याचिका में अदालत से गुहार लगाई गई है कि ट्रैफिक के सुचारू संचालन और सड़क हादसों पर लगाम लगाने के लिए मोटर व्हीकल एक्ट में दी गई इस तरह की छूट को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए साफ किया है कि अब केंद्र सरकार को इस पर अपना अंतिम जवाब तय समय सीमा में देना ही होगा।

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