कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। ग्वालियर में हर साल बारिश के साथ जलभराव की समस्या पर नगर निगम के दावों की हाईकोर्ट में कड़ी परीक्षा हुई। कोर्ट ने साफ पूछा कि क्या निगम यह गारंटी दे सकता है कि अब शहर में जलभराव नहीं होगा? इस सवाल पर नगर निगम कोई ठोस जवाब नहीं दे सका। हाईकोर्ट ने अमृत और स्मार्ट सिटी योजनाओं में खर्च हुई राशि, सीवर लाइन के कार्य और जलभराव रोकने के इंतजाम का पूरा हिसाब मांगा है। अब अगली सुनवाई 31 जुलाई को होगी।
दरअसल, ग्वालियर हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान नगर निगम ने दावा किया कि 236 चिन्हित स्थानों में से 109 जलभराव वाले पॉइंट्स पर सुधार कार्य किए गए हैं, लेकिन जब कोर्ट ने पूछा कि क्या अब इन स्थानों पर किसी भी परिस्थिति में पानी नहीं भरेगा, तो निगम इसकी गारंटी नहीं दे पाया। कोर्ट ने कहा कि जलभराव पर किए गए दावों की असली परीक्षा बारिश ही करेगी।
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कोर्ट ने नगर निगम से अमृत और स्मार्ट सिटी योजनाओं के तहत मिली कुल राशि, उस पर हुए खर्च, नई सीवर लाइनों की वास्तविक स्थिति और उनकी कार्यक्षमता का विस्तृत ब्यौरा मांगा है। साथ ही संवेदनशील क्षेत्रों में जलभराव रोकने के लिए किए गए उपायों की जानकारी भी तलब की गई है। निगम ने जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा, जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने अगली सुनवाई 31 जुलाई तय की है।
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गौरतलब है कि ग्वालियर में हर मानसून के दौरान आनंद नगर, ट्रांसपोर्ट नगर, पड़ाव चौराहा, महाराज बाड़ा, जीवाजी चौक, फूलबाग, हजीरा, मुरार और कई अन्य इलाके जलभराव से प्रभावित होते हैं। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस बार नगर निगम के दावे जमीन पर कितने सफल साबित होते हैं,फिलहाल हाईकोर्ट ने साफ कर दिया है कि केवल दावों से काम नहीं चलेगा, बल्कि बारिश के दौरान धरातल पर दिखने वाले परिणाम ही नगर निगम की तैयारियों की असली परीक्षा होंगे।
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