कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में बारिश से पहले जलभराव को लेकर हाईकोर्ट सख्त है। कोर्ट ने नगर निगम से पूछा कि क्या गारंटी है कि इस बार शहर में जलभराव नहीं होगा? इस पर निगम ने कहा कि शहर में जलभराव नहीं होगा, इसकी गारंटी नहीं दे सकते। हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि दावों की नहीं, बारिश असली परीक्षा करेगी।

ग्वालियर में जलभराव की समस्या को लेकर दायर जनहित याचिका पर एमपी हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ में सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट ने नगर निगम से सवाल पूछा कि क्या गारंटी है कि इस बार शहर में जलभराव नहीं होगा? कोर्ट ने अमृत और स्मार्ट सिटी योजना में खर्च राशि का पूरा हिसाब भी मांगा है।

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वहीं नगर निगम ने 236 में से 109 जलभराव वाले स्थानों पर सुधार का दावा किया है। इस पर कोर्ट ने प्रमाण मांगा है। नई सीवर लाइनों की वास्तविक क्षमता और कामकाज का ब्यौरा भी तलब किया है। संवेदनशील क्षेत्रों में जलभराव रोकने के उपायों की प्रगति रिपोर्ट भी मांगी गई है। कोर्ट ने कहा कि करोड़ों खर्च के बाद भी सीवर व्यवस्था पर गंभीर सवाल है। नगर निगम को विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए 31 जुलाई तक का समय दिया गया है।

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विधानसभा क्षेत्रवार आंकड़ों पर नजर डालें तो…

  • ग्वालियर विधानसभा में 72 जलभराव वाले स्थान चिन्हित हुए, जिनमें 32 स्थानों पर समस्या खत्म करने का दावा और 40 स्थानों पर अब भी काम बाकी है।
  • दक्षिण विधानसभा में 34 स्थान चिन्हित हुए, 23 पर काम पूरा होने का दावा जबकि 11 स्थान शेष।
  • ग्वालियर पूर्व विधानसभा सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, जहां 90 स्थान चिन्हित हुए, इनमें 46 स्थानों पर काम पूरा होने का दावा, 30 स्थानों पर काम बाकी है।
  • ग्रामीण विधानसभा में 40 स्थान चिन्हित हुए, जिनमें 16 स्थानों पर काम पूरा होने का दावा और 24 स्थानों पर काम बाकी है।

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