रोहित कश्यप, मुंगेली। जिला अस्पताल में सिविल सर्जन का पद रिक्त होने और अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को वित्तीय अधिकार नहीं मिलने से प्रशासनिक एवं वित्तीय दिक्कतों को लेकर लल्लूराम डॉट कॉम ने प्रमुखता से खबर चलाया, जिसका असर हुआ है। मामले को कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने गंभीरता से लेते हुए जिला अस्पताल के सिविल सर्जन के अतिरिक्त प्रभार पर कार्यरत सीएमएचओ डॉ. शीला साहा को वित्तीय अधिकार प्रदान किए हैं।अब अस्पताल में लंबे समय से प्रभावित वित्त संबंधी कार्यों में गति आने की उम्मीद है।

सीएमएचओ डॉ. शीला साहा ने बातचीत में बताया कि उन्हें वित्तीय अधिकार मिल गया है। इससे वित्त से संबंधित जो कार्य रुके हुए थे, उनमें अब तेजी आएगी और आगे वित्तीय कार्यों के रुकने की स्थिति नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि अस्पताल की आवश्यक वित्तीय प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाया जाएगा।

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वेतन भुगतान का रास्ता साफ, जल्द जारी होगा वेतन

जिला अस्पताल में वित्तीय अधिकार नहीं होने का सबसे बड़ा असर अधिकारी-कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर पड़ रहा था। जिला स्वास्थ्य समिति के अंतर्गत कार्यरत 71 अधिकारी-कर्मचारियों को करीब दो माह से वेतन नहीं मिला है, जबकि जिला अस्पताल के 104 नियमित अधिकारी-कर्मचारियों, डॉक्टरों एवं अन्य स्टाफ को करीब एक माह से वेतन का इंतजार था।सीएमएचओ ने बताया कि वित्तीय अधिकार मिलने के बाद अब वेतन भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और शीघ्र ही अधिकारी-कर्मचारियों तथा डॉक्टर एवं अन्य स्टाफ का लंबित वेतन जारी किया जा सकेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि वित्तीय अधिकार मिलने से वेतन सहित वित्त से जुड़े अन्य कार्यों को अब आगे बढ़ाया जा सकेगा।

सेवानिवृत्ति के बाद खाली हुआ सिविल सर्जन का पद

दरअसल, जिला अस्पताल के तत्कालीन सिविल सर्जन डॉ. एमके रॉय के सेवानिवृत्त होने के बाद करीब एक माह से सिविल सर्जन का पद रिक्त था। इसके बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. शीला साहा को सिविल सर्जन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया, लेकिन उनके पास पद का चालू प्रभार होने के बावजूद आवश्यक वित्तीय अधिकार नहीं थे। इसी वजह से अस्पताल से जुड़े कई वित्तीय एवं प्रशासनिक कार्य प्रभावित हो रहे थे। लल्लूराम डॉट कॉम ने जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं, लंबित वेतन और वित्तीय अधिकारों की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। अब कलेक्टर अमृत विकास तोपनो द्वारा सीएमएचओ को वित्तीय अधिकार दिए जाने के बाद व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है।

ओटी में सीपेज, ब्लड बैंक की फॉल सीलिंग पर भी कार्रवाई

जिला अस्पताल की वित्तीय समस्या के साथ-साथ अस्पताल की आधारभूत सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को भी खबर में प्रमुखता से उठाया गया था। 100 बिस्तर वाले मातृत्व एवं शिशु अस्पताल की ऑपरेशन थिएटर में सीपेज की समस्या सामने आई थी। इसके कारण फिलहाल वहां होने वाले मरीजों के ऑपरेशन जिला अस्पताल के पुराने ऑपरेशन थिएटर में किए जा रहे हैं।वहीं जिला अस्पताल के ब्लड बैंक कक्ष में सीपेज के कारण फॉल सीलिंग का प्लास्टर गिरने की घटना भी सामने आई थी। महत्वपूर्ण स्वास्थ्य इकाई में इस तरह प्लास्टर गिरने से बड़ा हादसा टल गया था। ब्लड बैंक जैसे संवेदनशील कक्ष में भवन की इस स्थिति को लेकर भी सवाल उठे थे।

सीजीएमएससी को पत्र, जिला स्तर पर होने वाले काम अब कराए जाएंगे

सीएमएचओ डॉ. शीला साहा ने बताया कि ऑपरेशन थिएटर में सीपेज और ब्लड बैंक कक्ष की फॉल सीलिंग की समस्या के संबंध में छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड (सीजीएमएससी) को पत्र लिखा गया है। उन्होंने कहा कि जिन मरम्मत कार्यों को जिला स्तर पर कराया जा सकता है, उन्हें अब वित्तीय अधिकार मिलने के बाद जिला स्तर से कराया जाएगा।
वहीं जिन कार्यों के लिए उच्च कार्यालय की स्वीकृति अथवा कार्रवाई आवश्यक है, उनके लिए भी संबंधित उच्च कार्यालयों से पत्राचार किया गया है। यानी अस्पताल की भवन संबंधी समस्याओं के निराकरण की दिशा में भी अब प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

प्रशासन ने दिखाई गंभीरता

जिला अस्पताल की बदहाल वित्तीय और आधारभूत व्यवस्थाओं को लेकर सामने आई खबर के बाद कलेक्टर अमृत विकास तोपनो ने मामले को गंभीरता से लिया और सबसे पहले सीएमएचओ को वित्तीय अधिकार देकर रुके हुए वित्तीय कार्यों को गति देने की पहल की है। वित्तीय अधिकार मिलने से जहां लंबे समय से लंबित वेतन भुगतान का रास्ता साफ हुआ है, वहीं अस्पताल के रोजमर्रा के वित्तीय कामकाज को भी सुचारू रूप से संचालित किए जाने की उम्मीद है। साथ ही ओटी सीपेज और ब्लड बैंक की फॉल सीलिंग की मरम्मत को लेकर भी संबंधित स्तर पर कार्रवाई शुरू होने की बात सामने आई है।

अब अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार की उम्मीद

जिले के सबसे प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र जिला अस्पताल पर बड़ी संख्या में मरीज निर्भर हैं। ऐसे में सिविल सर्जन का पद रिक्त होने, वित्तीय अधिकारों की कमी, वेतन भुगतान में देरी और अस्पताल की महत्वपूर्ण इकाइयों में भवन संबंधी समस्याओं ने व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए थे। हालांकि अब कलेक्टर द्वारा सीएमएचओ को वित्तीय अधिकार दिए जाने के बाद वित्तीय कामकाज और लंबित वेतन भुगतान में तेजी आने की उम्मीद है। वहीं ऑपरेशन थिएटर के सीपेज और ब्लड बैंक की फॉल सीलिंग की मरम्मत को लेकर भी प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।अब देखना होगा कि वित्तीय अधिकार मिलने के बाद लंबित वेतन कितनी जल्दी जारी होता है और अस्पताल की भवन एवं अन्य व्यवस्थाओं से जुड़ी समस्याओं का स्थायी समाधान कब तक किया जाता है।

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