हेमंत शर्मा, इंदौर। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में भ्रष्टाचार और रिश्वतखोरी के खिलाफ प्रशासन ने सख्त और बड़ी कार्रवाई की है। बिचौली हप्सी तहसील में पदस्थ एक पटवारी को कोर्ट के आदेश पर अमल करने के बदले 2 लाख रुपये की मोटी घूस मांगनाइतना भारी पड़ गया कि सीधे कलेक्टर की गाज उन पर गिर गई। कलेक्टर शिवम वर्मा के कड़े रुख के बाद आरोपी पटवारी अनुशील जोसफ को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है।

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‘जनसुनवाई’ में खुला पटवारी की काली कमाई का राज

सस्पेंस से भरा यह मामला तब सामने आया जब एक पीड़ित न्याय की आस लेकर सीधे कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचा। पीड़ित ने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई कि कोर्ट से उसके पक्ष में बटांकन का आदेश जारी हो चुका है। नियम के मुताबिक पटवारी को इसका पालन करना था लेकिन पटवारी अनुशील जोसफ उस आदेश को दबाकर बैठ गए। आरोप है कि फाइल को आगे बढ़ाने और आदेश का अमल कराने के बदले पटवारी साहिब पीड़ित से 2 लाख रुपये की रिश्वत की मांग कर रहे थे।

कलेक्टर का ‘ऑन द स्पॉट’ एक्शन, जांच में फंसे पटवारी

गरीब आवेदक को परेशान किए जाने की शिकायत को कलेक्टर शिवम वर्मा ने बेहद गंभीरता से लिया। उन्होंने बिना वक्त गंवाए मामले की तुरंत जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में जैसे ही पटवारी पर लगे रिश्वतखोरी के आरोप सही पाए गए अनुविभागीय अधिकारी राजस्व बिचौली हप्सी ने पटवारी अनुशील जोसफ को सस्पेंड करने का फरमान जारी कर दिया।

7 दिन का अल्टीमेटम

प्रशासन ने इस मामले में केवल निलंबन पर ही ब्रेक नहीं लगाया है बल्कि पटवारी के खिलाफ विभागीय जांच भी ठोक दी है। निलंबन की अवधि के दौरान पटवारी का मुख्यालय बिचौली हप्सी तहसील ही तय किया गया है।

संबंधित तहसीलदार को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि 7 दिन के भीतर आरोपी पटवारी के खिलाफ चार्जशीट और सभी जरूरी दस्तावेज तैयार कर पेश किए जाएं। जिससे विभागीय जांच को तेजी से आगे बढ़ाकर कड़ी सजा दी जा सके।

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पीड़ित को मिला न्याय: ‘काम अभी के अभी करो’

कलेक्टर शिवम वर्मा ने इस मामले में संवेदनशीलता की एक मिसाल भी पेश की है। उन्होंने सिर्फ करप्ट पटवारी पर एक्शन ही नहीं लिया बल्कि अधिकारियों को दो टूक निर्देश दिए हैं कि पीड़ित को अब एक चक्कर भी न काटना पड़े। न्यायालय के बटांकन आदेश का तत्काल पालन कराकर पीड़ित का काम तुरंत पूरा करने को कहा गया है।

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