संजय पाटीदार, भोपाल। मध्य प्रदेश स्कूल शिक्षा विभाग की स्वैच्छिक ट्रांसफर प्रक्रिया अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है लेकिन यह प्रक्रिया हजारों शिक्षकों के लिए राहत के बजाय बड़ी आफत बन गई है। पोर्टल की तकनीकी खामियों और विभाग के नए दस्तावेज के नियमों के कारण प्रदेशभर के शिक्षक बेहद परेशान हैं। सबसे बड़ा विवाद पति-पत्नी नीति के तहत ट्रांसफर चाहने वाले शिक्षकों के लिए विवाह पंजीयन प्रमाण पत्र को अनिवार्य किए जाने पर खड़ा हो गया है। वहीं शासकीय शिक्षक संगठन ने इस नियम का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि इस अव्यावहारिक शर्त के कारण कई पात्र शिक्षक इस प्रक्रिया से वंचित हो रहे हैं।

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‘20 साल पहले अनिवार्य नहीं था मैरिज सर्टिफिकेट, अब कहां से लाएं?’

शासकीय शिक्षक संगठन का कहना है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में ऐसे शिक्षक और कर्मचारी कार्यरत हैं जिनकी शादी आज से 15 से 20 वर्ष पहले हुई थी। उस दौर में मैरिज सर्टिफिकेट कराने का नियम अनिवार्य नहीं था। अब अचानक पोर्टल पर इसे अनिवार्य कर दिए जाने से बड़ी अजीब स्थिति पैदा हो गई है। पोर्टल बिना मैरिज सर्टिफिकेट के आवेदन ही स्वीकार नहीं कर रहा है जिससे सालों से ट्रांसफर की आस लगाए बैठे शिक्षकों को गहरा झटका लगा है।

अन्य सरकारी दस्तावेज भी बेकार, पोर्टल नहीं कर रहा स्वीकार

संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार पति-पत्नी के आधार पर ट्रांसफर का लाभ लेने वाले शिक्षकों के पास उनकी सर्विस बुक, परिवार की ‘समग्र आईडी’, नामांकन रिकॉर्ड और अन्य पुख्ता शासकीय दस्तावेज मौजूद हैं, जिनमें उनके विवाहित होने के स्पष्ट प्रमाण हैं। इसके बावजूद विभाग इन मान्य दस्तावेजों को दरकिनार कर केवल मैरिज सर्टिफिकेट की जिद पर अड़ा हुआ है जिससे आवेदन प्रक्रिया ठप पड़ी है।

सिर्फ मैरिज सर्टिफिकेट नहीं, इन तकनीकी दिक्कतों से भी जूझ रहे शिक्षक

शिक्षकों की मुसीबतें यहीं खत्म नहीं होतीं। ट्रांसफर पोर्टल में कई अन्य गंभीर तकनीकी कमियां भी सामने आई हैं:

  • दिव्यांगता प्रमाण पत्र अपलोड करने में लगातार समस्या आ रहा है।
  • म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प पोर्टल पर खुल ही नहीं रहा है।
  • पोर्टल पर जिला चयन के विकल्प दिखाई नहीं दे रहे हैं, जिससे शिक्षक अपनी पसंद का जिला नहीं चुन पा रहे हैं।
  • विभिन्न पदों से संबंधित तकनीकी गड़बड़ियों के कारण भी फॉर्म सबमिट नहीं हो रहे हैं।

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तारीख बढ़ाई जाए और वैकल्पिक दस्तावेजों को मिले मान्यता- संगठन

शासकीय शिक्षक संगठन के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष उपेन्द्र कौशल ने इस पूरी अव्यवस्था पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने सरकार और विभाग से मांग की है कि विवाह पंजीयन की इस अव्यावहारिक अनिवार्यता पर तत्काल पुनर्विचार किया जाए। सेवा पुस्तिका और समग्र आईडी जैसे वैकल्पिक शासकीय दस्तावेजों के आधार पर आवेदन स्वीकार किए जाएं। पोर्टल की तकनीकी खामियों को युद्धस्तर पर ठीक किया जाए। और आवेदन की अंतिम तिथि को आगे बढ़ाया जाए ताकि तकनीकी बाधाओं के कारण कोई भी पात्र शिक्षक इस प्रक्रिया से बाहर न हो।

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