चंकी बाजपेयी, इंदौर। बढ़ते साइबर अपराधों को रोकने के लिए साइबर सुरक्षा अभियान ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0’ के जरिए कार्रवाई की जा रही है। इसी कड़ी में इंदौर के परदेशीपुरा थाना पुलिस और साइबर सेल ने बड़ी कार्रवाई करते हुए फर्जी बैंक खातों की खरीद-फरोख्त करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने मामले में बैंक खाताधारक समेत 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि मुख्य ठग की तलाश जारी है।
2 हजार से 10 हजार रुपये में बेचे जाते थे खाते
डीसीपी अमन राठौड़ के अनुसार, राज्य साइबर सेल भोपाल की जारी गोपनीय सूची के आधार पर जांच की जा रही थी। जांच में पता चला कि आरोपी मोनिश उर्फ मोनू मंडलोई ने अपने दोस्त पीयूष उर्फ नयन कुशवाहा के कहने पर बैंक खाता खुलवाया था। मोनिश ने अपनी पासबुक, एटीएम और चेक बुक पीयूष को महज 2 हजार रुपए में बेच दी। इसके बाद पीयूष ने इसी अकाउंट को 5 हजार में ऋषि उर्फ बिट्टू पवार को बेच दिया। उसने आगे इसे 10 हजार रुपए में रूपेश उर्फ रॉनी को सौंप दिया।
USDT से INR एक्सचेंज के नाम पर ठगी
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपी रूपेश उर्फ रॉनी ने इस म्यूल बैंक खाते का इस्तेमाल क्रिप्टो करेंसी के नाम पर उत्तर प्रदेश और आंध्र प्रदेश के लोगों से ठगी करने के लिए किया। इससे हासिल की गई पूरी रकम इसी बैंक खाते में ट्रांसफर कराई जाती थी।
4 आरोपी गिरफ्तार, मुख्य सरगना की तलाश जारी
पुलिस ने कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों मोनिश मंडलोई, पीयूष कुशवाहा, ऋषि पवार और सुजल सोनी को गिरफ्तार कर लिया है। मुख्य आरोपी रूपेश मंगरोलिया फिलहाल फरार है, जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। वहीं सुजल सोनी की भूमिका की भी गहन जांच की जा रही है।
एक महीने तक चलेगा अभियान
डीसीपी अमन राठौड़ ने बताया कि ‘ऑपरेशन मैट्रिक्स 2.0’ के तहत यह अभियान एक महीने तक लगातार जारी रहेगा। साइबर अपराधों में इस्तेमाल की जाने वाली सिम और इस तरह किराए या खरीद पर लिए गए बैंक खातों के खाताधारकों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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