हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर फैमिली कोर्ट ने पति-पत्नी और बच्चे के भरण-पोषण से जुड़े एक मामले में ऐतिहासिक और बेहद अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने साफ कर दिया है कि यदि पति और पत्नी दोनों कमाने में सक्षम हैं तो बच्चे के पालन-पोषण और वित्तीय जिम्मेदारी का बोझ भी दोनों को मिलकर उठाना होगा। कोर्ट ने पत्नी द्वारा मांगी गई 50 हजार रुपये प्रतिमाह के भरण-पोषण की अर्जी को खारिज करते हुए पिता को केवल बच्चे की पढ़ाई का पूरा खर्च उठाने के निर्देश दिए हैं।

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क्या है पूरा मामला?

अदालत में एक दंपत्ति के बीच विवाद के बाद भरण-पोषण याचिका दायर की गई थी। पत्नी ने अपने और बच्चे के खर्चों के लिए पति से 50 हजार रुपये प्रति माह दिलाने की मांग की थी।

कोर्ट का रुख: मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि पति और पत्नी दोनों ही आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हैं और अच्छी कमाई करने में सक्षम हैं।

समान जिम्मेदारी का सिद्धांत: कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि आधुनिक दौर में जब माता-पिता दोनों आर्थिक रूप से मजबूत हैं, तो बच्चे के पालन-पोषण और देखभाल की नैतिक व वित्तीय जिम्मेदारी अकेले पिता पर नहीं डाली जा सकती। दोनों को बराबर का योगदान देना होगा।

बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठाएगा पिता, मां करेगी पालन-पोषण

अदालत ने बच्चे के भविष्य और सहूलियत को ध्यान में रखते हुए जिम्मेदारी का बंटवारा किया है:

पढ़ाई का पूरा खर्च: पिता को निर्देश दिए गए हैं कि वह बच्चे की स्कूल फीस और शिक्षा से जुड़े तमाम खर्च खुद वहन करेगा।

फीस रसीद जमा करने के निर्देश: पिता को समय-समय पर बच्चे की फीस जमा करने की रसीद अदालत में पेश करनी होगी, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि पढ़ाई का खर्च सही समय पर दिया जा रहा है।

पालन-पोषण की जिम्मेदारी: बच्चे के रोज़मर्रा के पालन-पोषण और देखभाल की मुख्य जिम्मेदारी मां को सौंपी गई है।

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क्यों अहम है फैमिली कोर्ट का यह फैसला?

अक्सर देखा जाता है कि वैवाहिक विवादों में भरण-पोषण की मोटी रकम मांगने की प्रवृत्ति बढ़ती जा रही है। ऐसे में इंदौर फैमिली कोर्ट का यह फैसला एक उदाहरण पेश करता है कि समान अधिकार के साथ समान जिम्मेदारी भी आती है। अगर पत्नी खुद कमाने में सक्षम है तो वह केवल पति पर निर्भर रहकर एकतरफा भारी भरकम भरण-पोषण का दावा नहीं कर सकती।

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