हेमंत शर्मा, Indore. पारिवारिक विवाद से जुड़े एक संवेदनशील मामले में हाईकोर्ट ने सुनवाई करते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने एक नाबालिग बेटी की कस्टडी उसके पिता को सौंपने का आदेश दिया है। मामले की सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि जिस पिता पर मां ने पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया था उसी मासूम बेटी ने कोर्ट के सामन आकर पूरी सच्चाई बयां कर दी र कहा- ‘मैं पापा के साथ ही सुरक्षित हूं और उन्ही के साथ रहना चाहती हूं।’
पारिवारिक रंजिश में ‘मोहरा’ बनाई गई मासूम
यह पूरा मामला एक पति-पत्नी के बीच लंबे समय से चल रहे आपसी विवाद से जुड़ा है। कानूनी लड़ाई के दौरान मां ने पिता को फंसाने के लिए अपनी ही नाबालिग बेटी का इस्तेमाल किया और पिता के खिलाफ छेड़छाड़ व पॉक्सो एक्ट के तहत गंभीर शिकायत दर्ज करा दी।
शिकायत के आधार पर पुलिस और प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्ची को पिता से अलग कर दिया था और उसे एक शेल्टर होम में भेज दिया था। जिसके बाद खुद पर लगे कलंक और बेटी से दूर किए जाने के इस फैसले को पिता ने स्वीकार नहीं किया। उन्होंने प्रशासन की इस कार्रवाई को सीधे हाई कोर्ट में चुनौती दी और अपनी बेटी की कस्टडी मांगी।
जज के सामने खुली मां के ‘दबाव’ की पोल
हाई कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए बच्ची को अदालत में तलब किया। जस्टिस ने संवेदनशील रुख अपनाते हुए बच्ची से सीधे बातचीत की, जिसके बाद कोर्ट रूम में मौजूद हर शख्स हैरान रह गया। बच्ची ने कोर्ट को एक लिखित पत्र सौंपा और जज के सामने खुलकर सच बोला। पत्र में लिखा कि
‘मेरे पापा ने मेरे साथ कभी कोई गलत हरकत नहीं की है। मां के अत्यधिक दबाव में आकर मैंने वह शिकायत दर्ज कराई थी। अब मैं किसी के बहकावे में नहीं आना चाहती। मैं अपने पापा के साथ सुरक्षित महसूस करती हूं, अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती हूं और अपनी मर्जी से पापा के साथ ही रहना चाहती हूं।‘
‘बच्ची का हित और इच्छा ही सर्वोपरि’- हाईकोर्ट नाबालिग बेटी के इस साहसिक बयान और लिखित पत्र के बाद कोर्ट ने साफ कर दिया कि किसी भी बच्चे के भविष्य और उसके सर्वोत्तम हित को माता-पिता के आपसी अहंकार की बलि नहीं चढ़ाया जा सकता। हाई कोर्ट ने मां के दावों को दरकिनार करते हुए और बच्ची की सुरक्षा व शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए उसकी कस्टडी तुरंत पिता को सौंपने के निर्देश जारी कर दिए। इस फैसले ने यह भी साबित कर दिया कि कानूनी दांवपेच में बच्चों को हथियार बनाने की कोशिशें अदालत के सामने टिक नहीं सकतीं।
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