हेमंत शर्मा, इंदौर। पश्चिमी रिंग रोड परियोजना को लेकर इंदौर में किसानों का विरोध एक बार फिर खुलकर सामने आया। मुआवजे और जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर नाराज किसानों ने सोमवार को भोपाल कूच का ऐलान किया था। करणी सेना के नेतृत्व में 39 गांवों के किसान बड़ी संख्या में ट्रैक्टर और चार पहिया वाहनों के साथ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को ज्ञापन देने के लिए रवाना हुए, लेकिन बरलाई गांव के पास पुलिस ने उनका काफिला रोक दिया। इसके बाद मौके पर तनाव बढ़ गया और हालात संभालने के लिए पुलिस को आंसू गैस, वाटर कैनन और हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।
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39 गांवों के किसान एक मंच पर
आंदोलन में शामिल किसानों का कहना है कि पश्चिमी रिंग रोड परियोजना के लिए जिन जमीनों का अधिग्रहण किया जा रहा है, उनका मुआवजा मौजूदा बाजार मूल्य के अनुरूप नहीं है। किसानों की मांग है कि उन्हें भूमि अधिग्रहण के बदले चार गुना मुआवजा दिया जाए और गाइडलाइन दरों में बढ़ोतरी की जाए। उनका दावा है कि मौजूदा दरों पर जमीन देने से हजारों परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी।
सुबह से ही अलग-अलग गांवों से किसान ट्रैक्टरों और कारों के काफिले के साथ इंदौर पहुंचे। आंदोलनकारियों के मुताबिक 100 से अधिक ट्रैक्टर और सैकड़ों वाहन इस काफिले में शामिल थे। किसानों का उद्देश्य भोपाल पहुंचकर मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपना और अपनी मांगों पर सीधे चर्चा करना था।
बरलाई गांव में रोका गया काफिला
पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर बरलाई गांव के पास किसानों को आगे बढ़ने से रोक दिया। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की लेकिन किसान भोपाल जाने की जिद पर अड़े रहे। देखते ही देखते मौके पर तनाव बढ़ गया और पुलिस तथा किसानों के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले रेड चिली आंसू गैस के गोले छोड़े। इसके बाद वाटर कैनन का इस्तेमाल किया गया। जब इसके बाद भी प्रदर्शनकारी पीछे नहीं हटे तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग किया। इस दौरान कुछ युवकों को हिरासत में भी लिया गया।
सड़क पर बैठ गए किसान
पुलिस कार्रवाई के बाद नाराज किसान बरलाई गांव के पास सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। किसान नेताओं ने कहा कि जब तक सरकार उनकी मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लेती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और बड़ा स्वरूप दिया जाएगा।
किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार उचित मुआवजा दिए बिना भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है। उनका कहना है कि खेती ही उनकी आजीविका का मुख्य साधन है और कम मुआवजे में जमीन छोड़ना उनके लिए संभव नहीं है।
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प्रशासन ने क्या कहा?
प्रशासन का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उसकी प्राथमिक जिम्मेदारी है। अधिकारियों के अनुसार किसानों से लगातार संवाद किया जा रहा है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास जारी है। पुलिस का कहना है कि किसी भी स्थिति में शांति व्यवस्था भंग नहीं होने दी जाएगी।
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