हेमंत शर्मा, इंदौर। कलेक्टर कार्यालय में मंगलवार की जनसुनवाई के दौरान एक ऐसी घटना हुई, जिसने सिर्फ प्रशासन को नहीं, बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है। शिकायत लेकर पहुंचा एक युवक अपने साथ केरोसिन लेकर प्रशासनिक संकुल के अंदर पहुंच गया और जनसुनवाई के दौरान खुद पर केरोसिन डालकर आत्मदाह की कोशिश की। मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने समय रहते युवक को पकड़ लिया और बड़ा हादसा होने से बच गया। लेकिन अब घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल युवक की शिकायत से भी आगे निकलकर कलेक्टर कार्यालय की सुरक्षा व्यवस्था पर खड़ा हो गया है।
केरोसिन लेकर अंदर कैसे पहुंचा युवक?
कलेक्टर कार्यालय कोई सामान्य सार्वजनिक परिसर नहीं है। इसी प्रशासनिक संकुल में कलेक्टर कार्यालय के साथ कई महत्वपूर्ण विभागों के दफ्तर हैं। जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक प्रशासनिक संकुल में कलेक्टर कार्यालय समेत कई जिला स्तरीय कार्यालय संचालित होते हैं।
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ऐसे में सवाल सीधा है कि अगर कोई व्यक्ति अपने साथ केरोसिन लेकर परिसर में पहुंच सकता है, तो सुरक्षा जांच कितनी गंभीर है? क्या प्रवेश द्वार पर सिर्फ व्यक्ति और वाहन की औपचारिक जांच हो रही है?क्या बैग और सामान की जांच होती है?क्या संदिग्ध तरल पदार्थों की पहचान के लिए कोई व्यवस्था है? और सबसे गंभीर सवाल ये कि अगर केरोसिन की जगह कोई व्यक्ति एसिड लेकर अंदर पहुंच जाए तो? या कोई दूसरा ज्वलनशील या खतरनाक पदार्थ लेकर कलेक्टर कार्यालय तक पहुंच जाए तो सुरक्षा व्यवस्था उसे रोक पाएगी?
कलेक्टर की सुरक्षा पर भी सवाल
यह घटना सिर्फ जनसुनवाई में मौजूद आम लोगों की सुरक्षा का मामला नहीं है। कलेक्टर और तमाम वरिष्ठ अधिकारियों की सुरक्षा भी इससे सीधे जुड़ी है। जनसुनवाई में बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचते हैं। पुलिस की जनसुनवाई में भी प्लॉट-मकान विवाद, वित्तीय धोखाधड़ी और पारिवारिक विवाद जैसे मामलों में बड़ी संख्या में लोग आवेदन लेकर पहुंचते रहे हैं। ऐसे माहौल में किसी व्यक्ति के हाथ में ज्वलनशील पदार्थ का परिसर के भीतर तक पहुंच जाना सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर चेतावनी माना जाना चाहिए।
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11.20 लाख की कथित धोखाधड़ी से परेशान था युवक
दरअसल, जामनिया खुर्द निवासी आकाश का आरोप है कि शुभम और गोलू कुशवाहा ने डीजे गाड़ी के नाम पर उसके साथ करीब 11.20 लाख रुपए के सौदे में धोखाधड़ी की। आकाश के मुताबिक, आरोपियों ने उससे 2 लाख रुपए नकद और कोरे चेक लिए। इसके बाद जिस गाड़ी को दिखाकर सौदा किया गया था, उसके बजाय दूसरी गाड़ी दे दी गई और खराब डीजे थमा दिया गया। युवक का आरोप है कि नए सामान के नाम पर उससे करीब 2.10 लाख रुपए और खर्च करवाए गए, जबकि बाद में 98 हजार रुपए लेने के बावजूद उसे गाड़ी उठाने की धमकी दी जाती रही। इसी कथित धोखाधड़ी और मानसिक प्रताड़ना से परेशान होकर युवक जनसुनवाई में पहुंचा था और उसने आत्मदाह जैसा कदम उठाया।
घटना ने प्रशासन के सामने एक बेहद गंभीर सवाल छोड़ दिया है। शिकायत लेकर आने वाला व्यक्ति अगर केरोसिन लेकर अंदर पहुंच गया, तो कल कोई और व्यक्ति एसिड, पेट्रोल या कोई दूसरा खतरनाक पदार्थ लेकर अंदर पहुंचने की कोशिश करे तो उसे कौन रोकेगा? अब जरूरत सिर्फ इस युवक के मामले की जांच की नहीं, बल्कि कलेक्टर कार्यालय की पूरी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की भी है।
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