अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते टकराव के बीच अब ईरान के अंदर भी रणनीति को लेकर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं. Strait of Hormuz के मुद्दे पर ईरान में अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गई है. एक तरफ जहां कट्टरपंथी गुट और IRGC होर्मुज स्ट्रेट पर नियंत्रण बनाकर बनाए रखने और अमेरिका से बदला लेने की बात कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की सरकार बातचीत के जरिए समाधान चाहती है.
इधर अमेरिका ने भी स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना उसकी राष्ट्रीय और रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है.
मिडिल ईस्ट में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच रहा है. अयातुल्ला अली खामेनेई को सुपुर्दे खाक करने की रस्मों के बीच अमेरिकी बमबारी से भड़के ईरान की सर्वोच्च सेना आईआरजीसी ने एक बार फिर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करने का ऐलान किया है.
जानकारों के अनुसार, IRGC का उद्देश्य केवल होर्मुज स्ट्रेट पर अपनी पकड़ बनाए रखना नहीं है, बल्कि अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला भी होर्मुज स्ट्रेट के माध्यम से लेना है. वहीं, दूसरी तरफ राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ जैसे नागरिक नेता सैन्य टकराव को आगे बढ़ाने के बजाय बातचीत के सहारे मिडिल ईस्ट का मुद्दा सुलझाना चाहते है और इसको एक बेहतर विकल्प मान रहे हैं.
IRGC ने अमेरिका के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर अपना नियंत्रण बनाए रखने और अमेरिका के खिलाफ जंग जारी रखने की बात कही, दूसरी ओर राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की सरकार बातचीत के जरिए समाधान निकालने के पक्ष में दिखाई दे रही है.
अमेरिका ने भी स्पष्ट कर दिया है कि होर्मुज स्ट्रेट को खुला रखना उसकी राष्ट्रीय और रणनीतिक प्राथमिकताओं में शामिल है. वॉशिंगटन का कहना है कि दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत तेल व्यापार के लिए यह समुद्री मार्ग बेहद महत्वपूर्ण है और इसे बंद करने की किसी भी कोशिश का कड़ा जवाब दिया जाएगा.
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