हेमंत शर्मा, इंदौर। इंदौर नगर निगम में यूनिपोल और लॉलीपॉप विज्ञापनों का मामला अब सिर्फ विज्ञापन आवंटन तक सीमित नहीं रह गया है। करोड़ों रुपये के राजस्व नुकसान के आरोपों के बीच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) की जांच ने पूरे मामले को नया मोड़ दे दिया है। आरोप है कि कुछ लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए नगर निगम के खजाने को करीब 11 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया गया ये आरोप EOW में की गई शिकायत में लगे है।
EOW की ओर से नगर निगम को भेजे गए पत्र में साफ तौर पर कहा गया है कि शिकायत के अनुसार विज्ञापन स्थलों के आवंटन और संचालन में अनियमितताएं हुईं, जिससे निगम को आर्थिक नुकसान हुआ। जांच एजेंसी ने आउटडोर विज्ञापन नीति-2017, टेंडर प्रक्रिया, प्रशासनिक स्वीकृतियां, नोटशीट और संबंधित अधिकारियों की जानकारी मांगी है। सूत्रों के मुताबिक, EOW की जांच के बीच अब नगर निगम प्रशासन MIC की बैठक में एक प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है।
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MIC में प्रस्ताव लाने की जरूरत क्यों पड़ रही ?
चर्चा है कि इस प्रस्ताव के जरिए यूनिपोल और लॉलीपॉप से जुड़े कुछ फैसलों को वैधानिक आधार देने की कोशिश की जा सकती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मामला जांच एजेंसी के पास पहुंच चुका है और दस्तावेज तलब किए जा चुके हैं, तब अचानक MIC में प्रस्ताव लाने की जरूरत क्यों पड़ रही है? क्या यह महज प्रशासनिक प्रक्रिया है या फिर पुराने निर्णयों को बचाने की कवायद?
जिम्मेदारों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि विज्ञापन स्थलों के आवंटन में नियमों का पालन नहीं किया गया। यदि जांच में यह आरोप सही साबित होते हैं तो जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। फिलहाल EOW की जांच जारी है और नगर निगम से मांगे गए दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। लेकिन जांच के बीच MIC में प्रस्ताव लाने की चर्चा ने राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
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सबसे बड़ा सवाल
क्या कुछ लोगों को एक करोड़ का फायदा पहुंचाने के लिए नगर निगम को 11 करोड़ का नुकसान कराया गया? और क्या अब MIC में प्रस्ताव लाकर पूरे मामले को वैध बनाने की कोशिश हो रही है? इन सवालों के जवाब अब EOW की जांच से ही सामने आएंगे।


