गढ़वा। झारखंड के गढ़वा जिले के जंगलों में बाघ की मौजूदगी से वन विभाग अलर्ट हो गया है। पलामू टाइगर रिजर्व (PTR) से सटे रमकंडा और भंडरिया समेत आसपास के वन क्षेत्रों में बाघ के पगमार्क मिलने के बाद निगरानी बढ़ा दी गई है। बाघ की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए जंगल में अलग-अलग जगहों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं।वन विभाग ने ग्रामीणों से सावधानी बरतने और जंगल में अनावश्यक आवाजाही से बचने की अपील की है।
चार प्रखंडों के जंगलों में बाघ की मौजूदगी
डीएफओ के अनुसार, गढ़वा जिले के रंका, रमकंडा, भंडरिया और बड़गड़ प्रखंड के वन क्षेत्रों में बाघ की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। वनकर्मियों को जंगल में बाघ के पगमार्क मिले हैं। इसके अलावा पहले मवेशियों के शिकार से जुड़े प्रमाण भी सामने आए थे।
इन सभी संकेतों के आधार पर वन विभाग ने बाघ की गतिविधि को गंभीरता से लेते हुए निगरानी अभियान तेज कर दिया है।
कैमरा ट्रैप से रखी जा रही नजर
बाघ की सही लोकेशन और उसकी आवाजाही का पता लगाने के लिए संभावित क्षेत्रों में पेड़ों पर कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं। वन विभाग की टीमें लगातार इन कैमरों की निगरानी कर रही हैं।
हालांकि, अभी तक बाघ कैमरा ट्रैप में कैद नहीं हुआ है। विभाग उसकी गतिविधियों और मूवमेंट का पता लगाने में जुटा है।
सुबह-शाम जंगल जाने से बचें ग्रामीण
गढ़वा डीएफओ एबीन बेनी अब्राहम ने बताया कि रंका, भंडरिया, बड़गड़ और रमकंडा क्षेत्र में बाघ की मौजूदगी की सूचना मिली थी। पगमार्क की जांच के बाद इसकी पुष्टि हुई है।
उन्होंने ग्रामीणों से अपील की है कि सुबह और शाम के समय जंगल में जाने से बचें और बिना जरूरत जंगल में प्रवेश न करें। साथ ही बाघ की कोई गतिविधि नजर आने पर तत्काल वन विभाग को सूचना देने की सलाह दी गई है।
मवेशियों की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता
वन विभाग बाघ की मौजूदगी को देखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों में भी सतर्कता बरत रहा है। लोगों से जंगल के आसपास अकेले जाने और मवेशियों को असुरक्षित तरीके से चराने से बचने की अपील की गई है। विभाग का कहना है कि कैमरा ट्रैप और मैदानी निगरानी के जरिए बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है।



