Dharm Desk – Jyeshtha Maah 2026 : ज्येष्ठ माह की शुरुआत 2 मई से हो गई है. आमतौर पर इस माह में 4 या 5 बड़े मंगल पड़ते हैं, लेकिन इस बार कुल 8 बड़े मंगल का व्रत रखा जाएगा. जिससे श्रद्धालुओं में खास उत्साह देखने को मिल रहा है. ज्येष्ठ मास दो भागों में विभाजित जैसा हो गया है. इसका कारण है एक अतिरिक्त म​हीने का जुड़ जाना. इस बार अधिकमास होने के कारण मंगलवार की संख्या बढ़कर 8 हो गई है. यह संयोग करीब 19 साल बाद बन रहा है. इससे पहले 2007 में ऐसा ही योग देखने को मिला था.

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, अधिकमास भगवान विष्णु को समर्पित होता है. इस दौरान किए गए जप-तप, दान और पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है. ऐसे में ज्येष्ठ और अधिकमास का संगम बड़े मंगल के महत्व को और भी बढ़ा देता है. मान्यता है कि इन दिनों में की गई पूजा से कर्ज, भय और शत्रु बाधाओं से राहत मिलती है और सुख-समृद्धि में बढ़ोतरी होती है. इस वर्ष बड़े मंगल की शुरुआत 5 मई से हो रही है. तिथियां इस प्रकार रहने वाली है. जब श्रद्धालु व्रत करेंगे- 5 मई (पहला), 12 मई (दूसरा), 19 मई (तीसरा), 26 मई (चौथा), 2 जून (पांचवा), 9 जून (छठा), 16 जून (सातवां) और 23 जून (आठवां). हर मंगलवार को विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक आयोजन किए जाएंगे.

हनुमान पूजा का विशेष महत्व

ज्येष्ठ मास के मंगलवार भगवान हनुमान को समर्पित माने जाते हैं. धार्मिक मान्यता है कि इसी दिन भगवान श्रीराम और हनुमानजी की पहली भेंट हुई थी. इस दिन श्रद्धालु व्रत रखते हैं. मंदिरों में जाकर पूजा करते है. सुंदरकांड व हनुमान चालीसा का पाठ करते है. जिससे जीवन की परेशानियां दूर होने की मान्यता है. बड़े मंगल के अवसर पर जगह-जगह भंडारे आयोजित किए जाते हैं. श्रद्धालु शरबत, फल और भोजन का वितरण करते हैं. इसे सेवा और पुण्य का कार्य माना जाता है. उत्तर भारत, विशेषकर उत्तर प्रदेश में इस दिन खास रौनक देखने को मिलती है, हालांकि कई जगहों पर इसे अलग-अलग तरीको से भी मनाया जाता है.