सोहराब आलम/ मोतिहारी। शिक्षा के मंदिर में परोसे गए जहरीले भोजन ने एक बार फिर सिस्टम की पोल खोल दी है। पूर्वी चंपारण के संग्रामपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय से एक बेहद गंभीर और विचलित करने वाला मामला सामने आया है। यहां रात के खाने में परोसी गई दाल-सब्जी में छिपकली पाई गई, जिसे खाने से आधा दर्जन से अधिक छात्राएं फूड प्वाइजनिंग की चपेट में आ गई हैं।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार मंगलवार की रात जब छात्राएं मेस में भोजन करने पहुंचीं तो परोसे गए भोजन में छिपकली दिखाई दी। उस समय तक कई छात्राएं भोजन कर चुकी थीं। कुछ ही देर बाद छात्राओं को पेट दर्द, उल्टी और घबराहट की शिकायत होने लगी। देखते ही देखते एक के बाद एक कई छात्राएं बीमार पड़ गई जिससे पूरे विद्यालय परिसर में अफरा-तफरी मच गई। विद्यालय प्रबंधन की इस भारी लापरवाही ने छात्राओं की जान जोखिम में डाल दी है।
अस्पताल में मची आपाधापी
बीमार छात्राओं को आनन-फानन में संग्रामपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां मौजूद डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार शुरू किया लेकिन कुछ छात्राओं की स्थिति गंभीर बनी हुई थी। उन्हें बेहतर इलाज के लिए मोतिहारी सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया है। फिलहाल सभी बीमार छात्राओं का इलाज जारी है।
गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
घटना की सूचना मिलते ही परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। अभिभावकों का कहना है कि आवासीय विद्यालयों में बच्चों को खाना खिलाने के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है। भोजन की गुणवत्ता पर पहले भी कई बार सवाल उठ चुके हैं लेकिन प्रशासनिक स्तर पर इसे अनदेखा किया गया।
प्रशासनिक जांच के आदेश
इस शर्मनाक घटना के बाद शिक्षा विभाग हरकत में आ गया है। विभाग के आला अधिकारियों ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। जिम्मेदारों का कहना है कि जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। क्या यह महज एक इत्तेफाक था या फिर मेस प्रबंधन की बड़ी चूक? यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा लेकिन तब तक जिले के अन्य आवासीय विद्यालयों में भोजन की सुरक्षा को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।

