कुंदन कुमार/ पटना। भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार और आरजेडी नेता खेसारी लाल यादव ने हाल ही में बिहार की राजनीति में एक बार फिर चर्चाओं को जन्म दे दिया है। खेसारी अचानक भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और कद्दावर नेता नितिन नवीन के आवास पर पहुंचे। इस मुलाकात के समय वहां बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी भी मौजूद थे। बंद कमरे में हुई इस लंबी बातचीत ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों का दौर शुरू कर दिया है।

​शिष्टाचार भेंट या राजनीतिक संदेश?

​मुलाकात के बाद जब खेसारी लाल यादव बाहर निकले, तो उन्होंने इसे पूरी तरह से एक ‘व्यक्तिगत भेंट’ करार दिया। उन्होंने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि नितिन नवीन उनके बड़े भाई के समान हैं और वे केवल उनके जन्मदिन की बधाई देने और उनका आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। खेसारी ने जोर देकर कहा, इस मुलाकात का कोई राजनीतिक अर्थ नहीं निकाला जाना चाहिए। मैं राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के साथ हूं और वहीं रहूंगा। मेरे राजनीतिक स्टैंड में कोई बदलाव नहीं आया है।

​अब कभी चुनाव नहीं लड़ूंगा – भावुक हुए खेसारी

​भले ही सार्वजनिक मंचों पर खेसारी इसे शिष्टाचार मुलाकात बता रहे हों, लेकिन अंदरूनी सूत्रों की मानें तो बैठक का लहजा काफी गंभीर और भावुक था। चर्चा है कि खेसारी लाल यादव ने नितिन नवीन और सम्राट चौधरी के समक्ष हाथ जोड़कर यह स्पष्ट कर दिया कि वे अब भविष्य में राजनीति से पूरी तरह दूरी बनाना चाहते हैं। कथित तौर पर उन्होंने कहा, अध्यक्ष जी, मुझे राजनीति से दूर ही रखिए। अब मैं जीवन में कभी कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा।

​हार का दर्द और राजनीति से मोहभंग

​गौरतलब है कि अक्टूबर 2025 में लालू प्रसाद यादव और तेजस्वी यादव की उपस्थिति में खेसारी लाल यादव ने अपनी पत्नी चंदा देवी के साथ राजद का दामन थामा था। पार्टी ने उन पर भरोसा जताते हुए उन्हें छपरा विधानसभा सीट से उम्मीदवार बनाया। हालांकि, यह चुनावी सफर उनके लिए सुखद नहीं रहा। भाजपा की प्रत्याशी छोटी कुमारी ने उन्हें लगभग 7,600 वोटों के कड़े मुकाबले में हरा दिया।
​चुनाव के परिणामों के बाद से ही खेसारी का राजनीति के प्रति मोहभंग नजर आया है। हार के बाद उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि राजनीति उनके स्वभाव के अनुकूल नहीं है। उन्होंने कहा था कि राजनीति में टिके रहने के लिए अक्सर झूठ का सहारा लेना पड़ता है, जबकि वे एक स्पष्टवादी व्यक्ति हैं जो सच बोलने में विश्वास रखते हैं।

​क्या यह है करियर का नया मोड़?

​नितिन नवीन और सम्राट चौधरी के साथ हुई इस मुलाकात को लोग कई चश्मों से देख रहे हैं। जहां एक ओर खेसारी इसे केवल निजी संबंध बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर उनके द्वारा चुनाव न लड़ने की बात करना यह संकेत देता है कि वे अब सक्रिय राजनीति से संन्यास की दिशा में कदम बढ़ा रहे हैं। अब देखना यह होगा कि खेसारी का यह ‘राजनीतिक वैराग्य’ आने वाले समय में आरजेडी के साथ उनके संबंधों को किस दिशा में ले जाता है।