Lightning Struck On IndiGo Flight: कोलकाता हवाई अड्डे (Kolkata Airport) पर शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। कोलकाता के सुभाषचंद्र बोस इंटरनेशनल एयरपोर्ट (Netaji Subhash Chandra Bose International Airport) पर इंडिगो फ्लाइट पर बिजली गिरी। हादसे के समय विमान के अंदर 141 यात्री बैठे हुए थे। आसमानी बिजली गिरने के बाद फ्लाइट का पावर सिस्टम प्रभावित हुआ और अचानक बिजली गुल हो गई। हादसे से सभी यात्री डर गए। गनीमत यह रही कि अगरतला जा रही इस फ्लाइट में बैठे 141 पैंसेजरों और 6 क्रू मेंबर्स को कोई नुकसान नहीं हुआ।
कोलकाता से त्रिपुरा की राजधानी अगरतला जाने वाली इंडिगो की फ्लाइट 6E6068 (Airbus A320 neo) का प्रस्थान समय 9:20 बजे सुबह निर्धारित था। खराब मौसम और भारी बारिश के कारण उड़ान में थोड़ी देरी हो रही थी।
9:30 बजे सुबह विमान हवाई अड्डे के एयरोब्रिज 56L पर खड़ा था और उड़ान भरने की तैयारी में था। इसी दौरान अचानक तेज कड़क के साथ विमान पर आसमानी बिजली गिरी। 9:31 बजे बिजली गिरने के तुरंत बाद विमान के पावर सिस्टम पर असर पड़ा, जिससे विमान के अंदर अचानक अंधेरा छा गया (सडन पावर ऑफ)। टरमैक (रनवे के पास) पर मौजूद इंडिगो के दो ग्राउंड स्टाफ कर्मचारी इसके प्रभाव से मामूली रूप से झुलस गए।
सुरक्षा नियमों के तहत यात्रियों को विमान से उतारा गया और नियमों के मुताबिक जरूरी जांच की गई। इसके बाद दूसरे विमान का इंतजाम किया गया। अधिकारी ने बताया कि जब बिजली गिरी, तो A320 विमान में 141 यात्री और छह क्रू मेंबर सवार थे। एहतियात के तौर पर एयरलाइन ने यात्रियों को विमान से उतार दिया और बाद में उन्हें A321 विमान (VT-ICD) से रवाना किया गया। यह फ्लाइट असल में सुबह 9.20 बजे रवाना होने वाली थी, लेकिन यात्रियों के साथ दोपहर 12.50 बजे रवाना हुई। दो ग्राउंड स्टाफ मामूली रूप से प्रभावित हुए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। मेडिकल चेकअप के तुरंत बाद उन्हें छुट्टी दे दी गई।
खतरनाक करेंट फैलने के बाद भी कैसे बच गई जान
फ्लाइट पर आकाशीय बिजली गिरने के बाद पूरे विमान में खतरनाक करंट फैल गया। बावजूद इसे किसी को भी कोई हानि नहीं हुई है। दरअसल यह मॉडर्न इंजीनियरिंग का कमाल है। विमान फैराडे केज सिद्धांत के आधार पर डिजाइन किए जाते हैं कि बिजली गिरने के बाद भी उसे नुकसान नहीं पहुंचता। विमान की बाहरी परत एल्युमिनियम जैसी मेटल से बनी होती है। कई विमानों के परतों में कार्बन कंपोजिट मेटल भी डाला जाता है, जिसमें तांबे की एक पतली जाली मिलाई जाती है। इसका फायदा यह होता है कि आसमानी बिजली का करेंट फ्लाइट के बाहर ही रह जाता है। बिजली विमान के एक छोर पर टकराती है और पूरी बॉडी से होते हुए दूसरे छोर से बाहर निकल जाती है।
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