केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कटौती पर फैसला अगले 2-3 महीनों में संभव है। जानिए तेल कंपनियों के घाटे और क्रूड ऑयल की कीमतों का पूरा अपडेट।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कमी होगी या नहीं, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया जा सकता। उनके मुताबिक, यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें अगले 2-3 महीनों तक कम बनी रहती हैं, तो आम लोगों को ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है।

महंगे क्रूड स्टॉक की वजह से नहीं घट रहीं कीमतें

मंत्री ने बताया कि ईरान संघर्ष के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें काफी बढ़ गई थीं। उस समय भारतीय तेल कंपनियों ने महंगे दामों पर कच्चा तेल खरीदा था। फिलहाल रिफाइनरियां उसी स्टॉक को प्रोसेस कर रही हैं, इसलिए कीमतों में तुरंत कटौती संभव नहीं है।

इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी तेल कंपनियों को 30 जून तक कुल 74,781 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। सरकार के अनुसार, लागत से कम कीमत पर पेट्रोल, डीजल और एलपीजी बेचने के कारण कंपनियों पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा है।

मई में बढ़े थे पेट्रोल-डीजल के दाम

मई महीने में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने के बाद सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दामों में 7.50 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी की थी। फिलहाल इन कंपनियों ने कीमतों में कोई नया बदलाव नहीं किया है।

इस बीच निजी कंपनी नायरा एनर्जी ने पेट्रोल की कीमत में 5 रुपये प्रति लीटर और डीजल में 3 रुपये प्रति लीटर की कटौती की है। इससे कुछ शहरों में उपभोक्ताओं को तत्काल राहत मिली है।

क्या होती है अंडर-रिकवरी?

जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद तेल कंपनियां उपभोक्ताओं पर पूरा बोझ नहीं डालतीं और लागत से कम कीमत पर ईंधन बेचती हैं, तो उस अंतर को अंडर-रिकवरी कहा जाता है। यही वजह है कि सरकारी तेल कंपनियों को लगातार भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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