कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर में फूड सेफ्टी विभाग की कार्रवाई पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला सामने आया है। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने श्रीराम डेयरी के संचालक पर लगाया गया एक लाख रुपये का जुर्माना रद्द कर दिया है। कोर्ट ने माना कि लिए गए सैंपल की जांच रिपोर्ट तय समय में नहीं दी गई और उसी देरी का नुकसान प्रशासन की पूरी कार्रवाई को उठाना पड़ा। कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब हर साल होली और दीपावली जैसे त्योहारों पर लिए जाने वाले खाद्य सैंपलों की रिपोर्ट भी महीनों बाद आने को लेकर सवाल उठते रहे हैं। इस मामले में भी रिपोर्ट में देरी,कार्रवाई के लिए कमजोर कड़ी बन गई।
READ MORE: महिला जज को धमकी देने का मामला: हाईकोर्ट की दो टूक- न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं; दो आरोपी को भेजा जेल
दरअसल मामला ग्वालियर के फोर्ट रोड स्थित श्रीराम डेयरी से जुड़ा है। फूड सेफ्टी अधिकारी ने 8 अगस्त 2023 को डेयरी का निरीक्षण किया था। उस दौरान 35 किलो घी,200 लीटर दूध, 30 किलो दही, 50 किलो मिल्क क्रीम और 20 किलो पनीर स्टोर मिला। अधिकारी ने मिल्क क्रीम और दही के नमूने लेकर जांच के लिए भोपाल की फूड लैब भेजे।मिल्क क्रीम की रिपोर्ट 3 अक्टूबर 2023 को आई और वह मानकों के अनुरूप पाई गई। लेकिन दही की रिपोर्ट 12 दिसंबर 2023 को जारी हुई, जिसमें दही को सब-स्टैंडर्ड बताया गया। इसी आधार पर फूड सेफ्टी अधिकारी ने कार्रवाई शुरू की और बाद में ADM ने 31 दिसंबर 2024 को डेयरी संचालक पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगा दिया।
हाईकोर्ट में अपील के दौरान डेयरी संचालक ने तर्क दिया कि कानून के अनुसार फूड एनालिस्ट को 14 दिन के भीतर रिपोर्ट देनी थी, लेकिन रिपोर्ट कई महीने बाद भेजी गई और देरी का कोई कारण नहीं बताया गया। कोर्ट ने रिकॉर्ड देखने के बाद माना कि रिपोर्ट में देरी हुई और फूड एनालिस्ट ने देरी का स्पष्टीकरण भी नहीं दिया। इतना ही नहीं, जांच प्रक्रिया शुरू करने और पूरी करने में हुई देरी का भी कोई उचित कारण रिकॉर्ड पर नहीं मिला।कोर्ट ने यह भी पाया कि दही में “मिल्क सॉलिड्स नॉन फैट” की मात्रा 7.5 प्रतिशत थी, जबकि मानक 8.7 प्रतिशत होना चाहिए था। यानी अंतर केवल 1.2 प्रतिशत का था। हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसले का हवाला देते हुए कहा कि इस तरह का मामूली अंतर नजरअंदाज किया जाना चाहिए था।
READ MORE: जहरीली गैस 2 किसानों के लिए बनी काल: कुएं में उतरे और फिर लौटे ही नहीं, दम घुटने से गई जान
इन्हीं कारणों से हाईकोर्ट ने अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट और प्रधान जिला न्यायाधीश दोनों के आदेश निरस्त कर दिए और डेयरी संचालक की अपील स्वीकार कर ली। कोर्ट के फैसले के बाद अब त्योहारों के दौरान लिए जाने वाले खाद्य सैंपलों की रिपोर्ट में होने वाली देरी पर भी सवाल तेज हो गए हैं,क्योंकि देर से आने वाली जांच रिपोर्टें कई बार पूरी प्रशासनिक कार्रवाई को कमजोर कर देती हैं।कुल मिलाकर हाईकोर्ट का यह फैसला सिर्फ एक डेयरी संचालक को राहत देने वाला नहीं, बल्कि फूड सेफ्टी जांच प्रक्रिया में समयबद्ध जांच रिपोर्ट की अहमियत को भी दर्शाने वाला माना जा रहा है।
Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

