​Automobile desk – देश में नया वाहन खरीदने की योजना बना रहे लोगों को अब अपनी जेब थोड़ी अधिक ढीली करनी पड़ेगी। सर्वोच्च न्यायालय ने थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए इसकी अनिवार्य समयावधि बढ़ाने का ऐतिहासिक निर्देश जारी किया है। नए आदेश के तहत अब नई कार खरीदने पर ग्राहकों को 4 साल और नए दोपहिया वाहन खरीदने पर 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस लेना अनिवार्य होगा।

​अदालत के इस फैसले का सीधा असर गाड़ियों की ‘ऑन-रोड’ कीमत पर पड़ेगा। बीमा कंपनियों द्वारा अतिरिक्त वर्षों का प्रीमियम अग्रिम रूप से जोड़ने के कारण नए वाहनों की शुरुआती लागत बढ़ जाएगी। गौरतलब है कि साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने नई कारों के लिए 3 साल और टू-व्हीलर्स के लिए 5 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य किया था, जिसे अब एक-एक साल के लिए और बढ़ा दिया गया है।

​बीमा नियामक IRDAI और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल की तरफ से जताई गई आपत्तियों और व्यावहारिक चुनौतियों को दरकिनार करते हुए शीर्ष अदालत ने यह सख्त कदम उठाया है। कोर्ट ने भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) को इस संबंध में तुरंत नए दिशा-निर्देश और संशोधित दरें जारी करने के आदेश दिए हैं, ताकि इस व्यवस्था को जल्द से जल्द लागू किया जा सके।

​सर्वोच्च न्यायालय ने इस कड़े फैसले की वजह बताते हुए कहा कि 2018 में लंबी अवधि का बीमा अनिवार्य किए जाने के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। संसद की स्थायी समिति के आंकड़ों का उल्लेख करते हुए अदालत ने बताया कि भारत में कुल 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़ वाहन बिना किसी वैध इंश्योरेंस के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। देश में करीब 56 प्रतिशत वाहनों का बीमा न होना एक बेहद गंभीर और चिंताजनक विषय है।

​अदालत का मानना है कि बिना इंश्योरेंस के चल रहे वाहनों के कारण सड़क हादसों का शिकार होने वाले पीड़ितों और उनके परिवारों को उचित मुआवजा मिलने में अत्यधिक परेशानियों और लंबी कानूनी प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ता है। आम जनता के सुरक्षा हितों और लोक कल्याण को ध्यान में रखते हुए ही थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस की अवधि को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।

​नियमों का सख्ती से पालन कराने के लिए शीर्ष अदालत ने केंद्र और राज्य सरकारों को प्रौद्योगिकी का सहारा लेने के कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। कोर्ट ने एक अभिनव सुझाव देते हुए कहा कि भविष्य में पेट्रोल पंपों के सिस्टम को VAHAN पोर्टल और इंश्योरेंस डेटाबेस से जोड़ा जा सकता है। इससे जिस भी वाहन का बीमा समाप्त हो चुका होगा, उसे रिन्यू न कराने तक ईंधन (पेट्रोल/डीजल) देने पर रोक लगाई जा सकेगी।

​इसके अलावा, यातायात पुलिस को आधुनिक तकनीक से लैस करने पर जोर दिया गया है। अदालत ने सुझाव दिया कि राज्यों की पुलिस को ऐसे हैंडहेल्ड डिजिटल उपकरण या मोबाइल एप्लिकेशन उपलब्ध कराए जाएं जो सीधे राष्ट्रीय इंश्योरेंस डेटाबेस से जुड़े हों। इससे चेकिंग के दौरान पुलिस अधिकारी मौके पर ही वाहन के बीमा की स्थिति का पता लगा सकेंगे और बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों का तुरंत डिजिटल ई-चालान काटा जा सकेगा।