Rajasthan Fake Degree Scam: राजस्थान में फर्जी डिग्रियों के जरिए सरकारी नौकरी पाने के बड़े खेल का पर्दाफाश करते हुए स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने एक और बड़ी मछली पर शिकंजा कसा है। अजमेर के चर्चित फर्जी डिग्री मामले में कार्रवाई करते हुए SOG ने मेवाड़ यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रेसिडेंट कौशल किशोर चन्द्रूल को गिरफ्तार कर लिया है। बताया जा रहा है कि इस पूरे सिंडिकेट में यह आरोपी ही डिग्रियों पर अंतिम मुहर और साइन करता था।

पूर्व डीन की निशानदेही पर जयपुर से गिरफ्तारी
SOG के एडिशनल एसपी श्याम सुंदर विश्नोई के नेतृत्व में टीम ने आरोपी कौशल किशोर को जयपुर से दबोचा है। इससे पहले यूनिवर्सिटी के पूर्व डीन ध्वज कीर्ति शर्मा को गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, डीन से हुई पूछताछ में ही पूर्व प्रेसिडेंट के काले कारनामों की पोल खुली। कोर्ट में पेश करने के बाद आरोपी को दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है, जहां उससे गिरोह के अन्य गुर्गों के बारे में उगलवाया जाएगा।
RPSC लेक्चरर भर्ती में ऐसे खुला फर्जीवाड़े का पिटारा
इस पूरे मामले की जड़ें राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की स्कूल लेक्चरर (हिंदी) परीक्षा-2022 से जुड़ी हैं। दरअसल, परीक्षा में चयनित दो युवतियों ने शुरुआत में वर्धमान महावीर ओपन यूनिवर्सिटी की डिग्री दिखाई थी, लेकिन बाद में मेवाड़ यूनिवर्सिटी की एमए की डिग्री पेश कर दी। जब आयोग को शक हुआ और जांच शुरू की गई, तो पता चला कि ये डिग्रियां पूरी तरह फर्जी थीं और बैक डेट में तैयार की गई थीं।
कमीशन का खेल: 11 आरोपी अब तक सलाखों के पीछे
SOG की जांच में सामने आया है कि कौशल किशोर चन्द्रूल कमीशन के आधार पर इस पूरे नेटवर्क को चला रहा था। वह फर्जी डिग्रियों को प्रमाणित करने के लिए अंतिम हस्ताक्षर करता था ताकि उन्हें असली दिखाया जा सके। इस मामले में अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जिनमें सरकारी शिक्षक दलपत सिंह और डॉक्टर सुरेश विश्नोई जैसे नाम भी शामिल हैं।
संगठित गिरोह की कड़ियां जोड़ रही पुलिस
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह एक संगठित गिरोह है जो भोले-भाले युवाओं या रसूखदारों को फर्जी डिग्रियां बेचकर सरकारी सिस्टम में सेंध लगा रहा था। पूछताछ में खुलासा हुआ है कि युवतियों को ये डिग्रियां उनके परिजनों के माध्यम से सेटिंग करके दिलवाई गई थीं। SOG को आशंका है कि रिमांड के दौरान पूर्व प्रेसिडेंट कई और रसूखदारों और यूनिवर्सिटी स्टाफ के नाम उगल सकता है, जिससे आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
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