Dharm Desk – आस्था का एक ऐसा अनोखा मंदिर जहां परंपराएं कुछ अलग ही रूप में नजर आती हैं. यहां न तो भगवान को लड्डू-खीर का भोग लगता है और न ही पारंपरिक मिठाइयों का, बल्कि श्रद्धालु बालाजी महाराज को चॉकलेट और टॉफी अर्पित करते हैं. यह अनोखी परंपरा ही इस मंदिर को बाकी धार्मिक स्थलों से अलग बनाती है. आस्था, विश्वास और अनोखी परंपराओं का संगम यह मंदिर श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति और सुकून प्रदान करता है.

नान्याजी महाराज मंदिर की अनोखी मान्यता
राजस्थान के सीकर जिले में चारण का बास क्षेत्र के पास स्थित नान्याजी महाराज मंदिर भले ही बहुत प्राचीन नहीं है, लेकिन इसकी महिमा और आस्था दूर-दूर तक फैल चुकी है. स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां दर्शन मात्र से रोगों का नाश होता है. मनोकामनाएं पूर्ण होती है. मंदिर के गर्भगृह में बालाजी महाराज और उनके परम भक्त की प्रतिमा एक साथ विराजमान है. जो श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र है.
चॉकलेट-टॉफी का विशेष भोग
मंदिर में हर दिन भक्तों की आवा जाही रहती है, लेकिन मंगलवार का दिन विशेष बजरंगबली का होने से इस दिन श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुंचते हैं. बालाजी को चॉकलेट-टॉफी का भोग लगाते है. यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है. भक्त पूरी श्रद्धा के साथ इसे निभाते है, मनोकामना पूर्ण होने पर लोग यहां विशेष अनुष्ठान और भंडारे का आयोजन भी करते है.
बिना दुकानदार की दुकान
मंदिर परिसर के बाहर एक अनोखी दुकान भी है. जहां टॉफी और चॉकलेट मिलती है लेकिन हैरानी की बात यह है कि वहां कोई दुकानदार नहीं होता. श्रद्धालु अपनी जरूरत के अनुसार, प्रसाद लेते है खुद ही पैसे वहां रख देते है. लोगों का मानना है कि इस पूरे क्षेत्र की देख रेख स्वयं नान्याजी महाराज करते है. इसलिए यहां किसी प्रकार की चोरी या अनियमितता नहीं होती हैं.
धुनी और कुएं की विशेष परंपरा आज भी
मंदिर के बाहर एक छोटा कुआं है, जहां निरंतर धुनी जलती रहती है, यहां एक अलग ही परंपरा देखने को मिलती ह भक्त मंदिर के अंदर दीया जलाने के बजाय कुएं के पास बालाजी के नाम का दीपक जलाते है. साथ ही, धुनी की राख को प्रसाद स्वरूप अपने साथ लेकर जाते है. जिसे अत्यंत पवित्र और चमत्कारी माना जाता है.
चौबीस कोसीय परिक्रमा का केंद्र
सीकर की प्रसिद्ध चौबीस कोसीय परिक्रमा भी इस मंदिर से होकर गुजरती है. जब तक श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन नहीं करतेl तब तक परिक्रमा अधूरी मानी जाती है. खेतों के बीच स्थित यह मंदिर न केवल धार्मिक बल्कि सांस्कृतिक दृष्टि से भी अत्यंत महत्वपूर्ण है.

