कृष्ण कुमार सैनी, चंडीगढ़। गुमशुदा व्यक्ति की तलाश को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली में बड़ा बदलाव किया गया है। नई SOP (Standard Operating Procedure—मानक कार्यप्रणाली) के तहत अब किसी व्यक्ति के लापता होने की सूचना मिलने के बाद पुलिस को तत्काल कार्रवाई करनी होगी। व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि यदि कोई गुमशुदा व्यक्ति दूसरे जिले या राज्य में पहुंच जाए, तो उसकी जानकारी बिना देरी संबंधित पुलिस एजेंसियों तक पहुंच सके और तलाश का दायरा तुरंत बढ़ाया जा सके।

नई व्यवस्था के तहत गुमशुदगी की सूचना को केवल DD Entry (डेली डायरी एंट्री) या सामान्य शिकायत के रूप में लंबित नहीं रखा जाएगा। सूचना मिलते ही कानूनी कार्रवाई शुरू करने के साथ-साथ तलाश अभियान और डिजिटल अलर्ट की प्रक्रिया भी शुरू करनी होगी। यानी गुमशुदगी की सूचना मिलने के बाद पुलिस को शुरुआती समय को बेहद महत्वपूर्ण मानते हुए तत्काल कदम उठाने होंगे।

गुमशुदगी के बाद तुरंत शुरू होगी कार्रवाई

नई SOP के अनुसार गुमशुदगी की सूचना मिलने पर पुलिस को तत्काल FIR दर्ज करनी होगी। अब गुमशुदगी के मामलों में 24 घंटे इंतजार करने की व्यवस्था नहीं रहेगी। सूचना मिलते ही पहले घंटे से ही तलाश अभियान शुरू करना होगा।

पुलिस को गुमशुदा व्यक्ति के संभावित मार्ग और आसपास के इलाकों में लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालनी होगी। आवश्यकता पड़ने पर मोबाइल लोकेशन की भी जांच की जाएगी, ताकि व्यक्ति की संभावित स्थिति का पता लगाया जा सके।

इसके साथ ही बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों को गुमशुदा व्यक्ति की जानकारी देकर अलर्ट किया जाएगा। यदि व्यक्ति के दूसरे जिले या राज्य में जाने की आशंका हो तो पड़ोसी जिलों और राज्यों की पुलिस को भी तत्काल सूचना भेजी जाएगी।

गुमशुदा व्यक्ति से संबंधित आवश्यक विवरण को निर्धारित डिजिटल पोर्टलों पर अपलोड किया जाएगा, जिससे दूसरे क्षेत्रों की पुलिस और संबंधित एजेंसियों तक जानकारी तेजी से पहुंच सके।

बरामदगी के बाद पहचान की भी होगी पुष्टि

नई व्यवस्था में सिर्फ गुमशुदा व्यक्ति को तलाशना ही नहीं, बल्कि उसकी सही पहचान सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया है। बरामद व्यक्ति की पहचान आधार और बायोमेट्रिक सत्यापन के माध्यम से सुनिश्चित करने की व्यवस्था रखी गई है। इससे गलत पहचान या किसी अन्य व्यक्ति को परिजनों के हवाले किए जाने की संभावना को कम किया जा सकेगा।

मानव तस्करी की आशंका पर AHTU को जिम्मेदारी

यदि किसी गुमशुदगी के मामले में मानव तस्करी की आशंका सामने आती है तो मामले को AHTU (Anti-Human Trafficking Unit—मानव तस्करी रोधी इकाई) को सौंपा जाएगा। इससे ऐसे मामलों की जांच विशेषज्ञ इकाई के स्तर पर आगे बढ़ाई जा सकेगी और संभावित तस्करी नेटवर्क की भी पड़ताल की जा सकेगी।

बच्चों की गुमशुदगी पर विशेष प्रक्रिया

बच्चों से जुड़े मामलों में भी नई SOP के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा। बरामद बच्चे को जरूरत पड़ने पर CWC (Child Welfare Committee—बाल कल्याण समिति) की मंजूरी के बिना सीधे परिजनों को नहीं सौंपा जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चे की सुरक्षा और उसके हितों को प्राथमिकता देना है।

शुरुआती घंटे होंगे सबसे अहम

नई व्यवस्था का सबसे बड़ा उद्देश्य गुमशुदगी के मामलों में ‘गोल्डन ऑवर’ यानी शुरुआती महत्वपूर्ण समय का प्रभावी इस्तेमाल करना है। पुलिस को शिकायत मिलने के बाद केवल औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार करने के बजाय तत्काल तलाश शुरू करनी होगी।

इस व्यवस्था से उन परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिन्हें किसी सदस्य के अचानक लापता होने के बाद पुलिस कार्रवाई शुरू होने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता था। नई SOP के तहत गुमशुदगी को अब केवल एक सामान्य शिकायत के तौर पर देखने के बजाय तत्काल पुलिस कार्रवाई वाले मामले के रूप में लिया जाएगा।

नई व्यवस्था में FIR, CCTV फुटेज, मोबाइल लोकेशन, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर अलर्ट, पड़ोसी जिलों व राज्यों को सूचना और डिजिटल पोर्टल पर विवरण अपलोड करने जैसे कदमों को एक साथ जोड़कर तलाश प्रक्रिया को तेज करने पर जोर दिया गया है। इससे गुमशुदा व्यक्ति की तलाश का दायरा शुरुआती समय में ही व्यापक किया जा सकेगा।

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m