​सोहराब आलम, पूर्वी चंपारण। मोतिहारी में आगामी नीट (NEET) परीक्षा को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह से सतर्क और मुस्तैद है। परीक्षा की शुचिता बनाए रखने और इसे कदाचार मुक्त संपन्न कराने के उद्देश्य से स्थानीय प्रशासन ने व्यापक जांच अभियान शुरू कर दिया है। सदर एसडीएम निशांत सेहरा और एसडीपीओ दिलीप कुमार ने संयुक्त रूप से शहर के विभिन्न परीक्षा केंद्रों और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने वाले प्रमुख कोचिंग संस्थानों का औचक निरीक्षण किया।

​सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम

​निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने न केवल परीक्षा केंद्रों की आधारभूत संरचना का जायजा लिया बल्कि कोचिंग संस्थानों में छात्रों से सीधा संवाद भी किया। एसडीएम निशांत सेहरा ने स्पष्ट किया कि प्रशासन किसी भी प्रकार की चूक के लिए तैयार नहीं है। परीक्षा केंद्रों के आसपास के क्षेत्रों की भी गहन निगरानी की जा रही है। उन्होंने छात्रों से किसी भी प्रकार की भ्रामक खबरों या अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। वहीं एसडीपीओ दिलीप कुमार ने सुरक्षा का भरोसा दिलाते हुए कहा कि जिले के सभी 13 परीक्षा केंद्रों पर मजिस्ट्रेटों की तैनाती सुनिश्चित की जाएगी ताकि कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में रहे।

​परीक्षा प्रणाली पर उठते सवाल और छात्रों का संघर्ष

​प्रशासन की तैयारियों के बीच नीट परीक्षा की राष्ट्रव्यापी व्यवस्था पर गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं। हाल ही में सामने आया है कि एक विद्यार्थी को परीक्षा केंद्र के रूप में अबू धाबी (UAE) आवंटित किया गया है जो चर्चा और आक्रोश का विषय बना हुआ है। सोशल मीडिया और आम जनमानस में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या देशभर में पेपर वितरण के लिए भारतीय वायुसेना के C-17 ग्लोबमास्टर जैसे विमानों की आवश्यकता पड़ रही है, तो विदेश में स्थित केंद्रों पर प्रश्न-पत्र पहुंचाने के लिए क्या एयर फोर्स वन का इस्तेमाल होगा?
​लगातार हो रही पेपर लीक और धांधली की खबरों ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और मनोबल पर गहरा प्रहार किया है। भारत का विद्यार्थी आज अपनी पढ़ाई करने के बजाय परीक्षा प्रक्रिया की कमियों और भ्रष्टाचार से लड़ने को मजबूर है। ऐसे में यह सवाल प्रशासनिक तंत्र के लिए चुनौती बना हुआ है क्या भारत में अब कोई भी महत्वपूर्ण परीक्षा बिना किसी गड़बड़ी के संपन्न हो पाना संभव नहीं है? क्या छात्रों का भविष्य केवल सरकारी तंत्र की अनिश्चितताओं के भरोसे रहेगा? प्रशासन मोतिहारी में तो अलर्ट है लेकिन क्या राष्ट्रीय स्तर पर परीक्षा की साख फिर से बहाल हो पाएगी?