सोहराब आलम/​मोतिहारी। जिले में बिजली व्यवस्था की लचर स्थिति को लेकर जनप्रतिनिधियों का आक्रोश चरम पर है। राधा कृष्ण भवन में आयोजित जिला स्तरीय विद्युत समिति की बैठक में सांसद व पूर्व केंद्रीय मंत्री राधामोहन सिंह की अध्यक्षता में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली की जमकर खिंचाई की गई। बैठक में जिले के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों और उनके प्रतिनिधियों ने शिरकत की और जमीनी स्तर पर बिजली विभाग की गंभीर विफलताएं उजागर कीं।

​जनप्रतिनिधियों ने गिनाईं विभाग की विफलताएं

​बैठक के दौरान विधायकों ने एक स्वर में बिजली विभाग के अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए प्रमुख मुद्दों में निम्नलिखित शामिल थे:

  • ​खराब ट्रांसफार्मरों का विलंबित प्रतिस्थापन: ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जले या खराब हुए ट्रांसफार्मरों को बदलने में विभाग द्वारा बरती जा रही अत्यधिक देरी।
  • ​अनियमित विद्युत आपूर्ति: जिले के अधिकांश हिस्सों में बिजली की लगातार कटौती और वोल्टेज की समस्या।
  • ​स्मार्ट मीटर की विसंगतियां: स्मार्ट मीटर के नाम पर आम उपभोक्ताओं को हो रही परेशानी और बिलिंग में धांधली की शिकायतें।
  • ​अधिकारियों का गैर-जिम्मेदाराना रवैया: विभागीय अधिकारियों द्वारा जन समस्याओं के प्रति उपेक्षा और मनमानी।
  • ​आधारभूत संरचना का अभाव: कृषि फीडरों की बदहाली, बिजली तारों की व्यापक चोरी और जर्जर होते खंभे व तार।

​इन समस्याओं के कारण जनता के बीच व्याप्त आक्रोश को जनप्रतिनिधियों ने पूरी गंभीरता के साथ सदन में रखा और त्वरित समाधान की मांग की।

​सौर ऊर्जा ही भविष्य का विकल्प: राधामोहन

​बैठक को संबोधित करते हुए सांसद राधामोहन सिंह ने स्वीकार किया कि विद्युत आपूर्ति में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि केंद्र और बिहार सरकार जिले में बिजली व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सौर ऊर्जा भविष्य की सबसे बड़ी जरूरत है और इस दिशा में सरकार तेजी से कदम उठा रही है। सौर ऊर्जा को अपनाने से न केवल बिजली की कमी दूर होगी, बल्कि यह व्यवस्था को आत्मनिर्भर और अधिक कुशल बनाएगी।

​अधिकारियों को सख्त चेतावनी

​सांसद ने सभी बिजली विभाग अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए इन बिंदुओं को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि भविष्य में कार्यों में लापरवाही बरती गई, तो संबंधित अधिकारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बैठक में अधिकारियों को एक निश्चित समय सीमा के भीतर समस्याओं के निराकरण की रिपोर्ट पेश करने का भी निर्देश दिया गया है।