दीपक कौरव, नरसिंहपुर। मध्य प्रदेश में बीते कुछ समय से 2600 सरकारी स्कूलों के बंद होने की ख़बरों से सियासी घमासान मचा हुआ है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर आड़े हाथ लिया है। वहीं अब स्कूल शिक्षा मंत्री ने इस पर सफाई देते हुए इसका खंडन किया।
शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह ने कहा कि वे मध्य प्रदेश में बड़े पैमाने पर सरकारी स्कूल बंद होने की बात से बिल्कुल सहमत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि एक हजार के आस पास संस्थाएं बंद हुई हैं। कई बार गांव में शिक्षित बच्चे स्कूल खोल लेते हैं, 3-4 साल चलाने के बाद नहीं चली तो बंद कर देते हैं। हम जिम्मेदारी के साथ कह सकते हैं कि मध्य प्रदेश में एक भी ऐसा स्कूल जहां बच्चे हैं, उन्हें हमने बंद किया हो या सरकार ने मानसिकता की वजह बंद किया हो ऐसा नहीं है।
उन्होंने आगे बताया कि या तो स्कूलों में बच्चे नहीं थे इसलिए अस्थायी बंद किया। कम बच्चे थे तो बगल के स्कूलों में शिफ्ट कर दिया। बच्चे मिलेंगे तो दोबारा शुरू करेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि मध्य प्रदेश में 375 ‘सांदीपनि स्कूल’ शुरू किए गए हैं। इन सर्वसुविधायुक्त स्कूलों में आसपास की शालाओं को मर्ज (विलय) किया गया है, जिसके कारण करीब 1,000 के आसपास शालाएं समायोजित हुई हैं।”
बच्चे बढ़ेंगे तो दोबारा खुलेंगे अस्थाई रूप से बंद स्कूल
शिक्षा मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने केवल 400 के करीब ऐसी शालाओं को अस्थाई रूप से बंद किया है, जहां छात्रों की संख्या बहुत कम या शून्य हो गई थी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिस दिन भी इन क्षेत्रों में बच्चों की संख्या पर्याप्त होगी, इन शालाओं को दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।
322 अवैध मदरसे भी किए गए बंद
शिक्षा मंत्री ने आगे जानकारी देते हुए बताया कि नियमों का पालन न करने और कमियों के कारण प्रदेश भर में लगभग 322 मदरसों को बंद कराया गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए प्रतिबद्ध है और सांदीपनि स्कूलों के माध्यम से छात्रों को आधुनिक व बेहतर शिक्षा प्रदान की जा रही है।
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