शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश में सामने आए बहुचर्चित और गंभीर फर्जी पासपोर्ट मामले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) अब बड़ी कार्रवाई की तैयारी में है। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से फर्जी पतों पर बनाए गए 70 पासपोर्ट के मामले में STF जल्द ही मुख्य आरोपियों के खिलाफ LOC जारी करने जा रही है।

बौद्ध मठों के पते पर बने 70 फर्जी पासपोर्ट 

जांच में खुलासा हुआ है कि गिरोह ने मध्य प्रदेश के डबरा, भोपाल, बैतूल, छिंदवाड़ा और पांढुर्णा स्थित बौद्ध मठों के फर्जी पते का इस्तेमाल कर 70 से अधिक पासपोर्ट बनवाए थे। इस फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। STF अब तक इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनसे लगातार पूछताछ जारी है।

बांग्लादेशी कनेक्शन का खुलासा 

मामले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इसमें अंतर्राष्ट्रीय और बांग्लादेशी कनेक्शन के अहम सबूत सामने आ रहे हैं। STF की अलग-अलग टीमें असम सहित देश और प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में दबिश दे रही हैं। अंदेशा जताया जा रहा है कि फर्जी पासपोर्ट के जरिए घुसपैठियों या अवैध रूप से रह रहे लोगों को विदेश भेजने का बड़ा नेटवर्क काम कर रहा था।

क्यों और कैसे जारी होता है LOC?

  • जब जांच एजेंसी को आरोपी के विदेश भागने का अंदेशा होता है, तो वह इमिग्रेशन विभाग को LOC जारी करने का प्रस्ताव भेजती है। इससे देश के सभी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट्स और बॉर्डर चेक पोस्ट्स पर अलर्ट लग जाता है।
  • इस मामले में आरोपियों के पास पहले से ही कई फर्जी पहचान पत्र और पासपोर्ट हो सकते हैं, जिनकी मदद से वे देश छोड़ने की कोशिश कर सकते हैं।
  •  STF ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन (Bureau of Immigration) को संदिग्धों के नाम और विवरण की सूची भेजेगी। यदि आरोपी किसी भी एयरपोर्ट या एग्जिट पॉइंट पर पहुंचता है, तो इमिग्रेशन सिस्टम में तुरंत रेड फ्लैग आ जाएगा। वहां से उसे डिटेन कर STF को सौंप दिया जाएगा, जिससे वे बिना कोर्ट की अनुमति के देश से बाहर नहीं भाग सकेंगे।

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