कर्ण मिश्रा, ग्वालियर। ग्वालियर नगर निगम में एक बार फिर प्रशासनिक नेतृत्व बदल गया है। करीब डेढ़ साल तक निगम आयुक्त की जिम्मेदारी संभालने वाले संघ प्रिय अब सिंगरौली जिला पंचायत CEO होंगे। उनकी जगह 2018 बैच के IAS अधिकारी अभिषेक चौधरी ग्वालियर नगर निगम की कमान संभालेंगे, तबादला तो प्रशासनिक आदेश है लेकिन जिस वक्त यह बदलाव हुआ है, उसने इसके पीछे की टाइमिंग को लेकर सियासी चर्चा जरूर छेड़ दी है।

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पार्षद से तकरार से शुरू हुई कहानी… पुलिस शिकायत और फिर ‘ट्रांसफर’

दरअसल नगर निगम परिषद की बीती बैठक में माहौल उस वक्त गरमा गया था, जब भाजपा पार्षद मोहित जाट और बृजेश श्रीवास की आयुक्त संघ प्रिय से तीखी बहस हुई। विवाद इतना बढ़ा कि पार्षद सभापति की आसंदी तक पहुंच गए। आयुक्त की कार्यशैली और उनके व्यवहार को लेकर भाजपा पार्षदों ने सवाल खड़े किए, इसी विवाद के बीच 23 जुलाई के CCTV फुटेज को आधार बनाकर आयुक्त की ओर से भाजपा पार्षद बृजेश श्रीवास के खिलाफ पुलिस को पत्र भेजा गया। पत्र में चोरी जैसे गंभीर आरोप लगाए गए और FIR की मांग की गई, इसके बाद भाजपा पार्षदों की जिला भाजपा अध्यक्ष जयप्रकाश राजोरिया से मुलाकात की खबर सामने आई। माना जा रहा था कि मामला आगे बढ़ सकता है और आयुक्त के खिलाफ शिकायत भी हो सकती है। लेकिन शिकायत सामने आने से पहले ही प्रशासनिक फेरबदल हो गया।

तबादले को लेकर स्थानीय राजनीति में चर्चाओं का दौर

अब इसे सिर्फ संयोग माना जाए या घटनाक्रमों की कड़ी से जोड़कर देखा जाए, यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा राजनीतिक सवाल बन गया है, हालांकि सरकार की ओर से तबादले को लेकर किसी विवाद का कोई कारण नहीं बताया गया है। लिहाजा आधिकारिक तौर पर यह एक प्रशासनिक निर्णय ही है। लेकिन ग्वालियर की स्थानीय राजनीति में इस तबादले को लेकर चर्चाओं का दौर जरूर शुरू हो गया है। यही वजह  है कि नए आयुक्त के सामने सिर्फ राजनीतिक समीकरण ही चुनौती नहीं होंगे। ग्वालियर शहर इस वक्त कई बुनियादी समस्याओं से जूझ रहा है।

सबसे बड़ा मुद्दा सड़कों का है। बदहाल सड़कों को लेकर मामला हाईकोर्ट तक पहुंचा है और सड़कों की गुणवत्ता की जांच के लिए सैंपलिंग कराई जा रही है। बारिश के दौरान जलभराव, गड्ढे और खराब सड़कें शहरवासियों की परेशानी बढ़ा रही हैं, सफाई और कचरा प्रबंधन भी निगम के लिए लगातार चुनौती बना हुआ है। ऐसे में नए आयुक्त के सामने फाइलों से ज्यादा शहर की जमीन पर काम दिखाने की चुनौती होगी।

तबादले पर शुरू हुआ राजनीतिक घमासान

मामला यही तक नही, कांग्रेस ने तबादले को राजनीतिक साजिश करार दिया है, कांग्रेस का कहना है कि भाजपा पार्षद के खिलाफ आयुक्त की ओर से की गई कार्रवाई के बाद यह बदलाव हुआ और कांग्रेस की महापौर होने के कारण ग्वालियर के साथ भेदभाव किया जा रहा है। वहीं भाजपा का तर्क इससे बिल्कुल अलग है। भाजपा का कहना है कि नगर निगम की कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल में शहर की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकी और अब अपनी नाकामी से ध्यान हटाने के लिए प्रशासनिक तबादले को राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। भाजपा ने संघ प्रिय के तबादले को सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया बताया है।

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नए निगमायुक्त अभिषेक चौधरी के सामने चुनौतियों का पहाड़

बहरहाल इस वाक्ये के दो पहलू हैं। सरकार के लिए यह एक सामान्य प्रशासनिक बदलाव है, जबकि ग्वालियर की सियासत में इसकी टाइमिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अब संघ प्रिय की जगह अभिषेक चौधरी के सामने सिर्फ नगर निगम चलाने की जिम्मेदारी नहीं होगी, बल्कि परिषद और प्रशासन के बीच तालमेल, हाईकोर्ट की निगरानी में सड़कों की जांच, सफाई व्यवस्था और शहर की दूसरी नागरिक समस्याओं पर भी तेजी से काम करना होगा।

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