कुमार इंदर, जबलपुर। गड्ढों में बसी सड़कें या सड़कों पर बिखरे गड्ढे? यह सवाल अब हर जबलपुरिया की जुबान पर है। संस्कारधानी कहे जाने वाले जबलपुर में आजकल गाड़ियों के शॉक-अप और जनता की कमर, दोनों एक साथ टूट रही हैं। मानसून की हल्की सी बारिश क्या हुई, शहर की मुख्य सड़कों से लेकर मोहल्लों की गलियों तक ने अपने घुटने टेक दिए हैं,अब सफर मंजिल तक पहुंचने का नहीं, बल्कि हादसों से बचकर निकलने का नाम बन चुका है!
संस्कारधानी जबलपुर की सड़कों का हाल किसी से छिपा नहीं है। जरा सी बारिश हुई नहीं कि सड़कों का डामर बह जाता है और बचते हैं केवल बड़े-बड़े गड्ढे। हर साल करोड़ों का बजट पास होता है, काम होता है, लेकिन मानसून आते ही सड़कें खस्ताहाल हो जाती हैं। गड्ढों से भरी इन सड़कों को देखकर लगता है मानो किसी दूसरे ग्रह की तस्वीर हो। ठेकेदार बेखौफ हैं और जनता इन बदहाल सड़कों पर हिचकोले खाने को मजबूर है।
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सड़कों की इसी खस्ताहाली को लेकर कांग्रेस ने मोर्चा खोल रखा है। कांग्रेस के हल्ला बोल और भ्रष्टाचार के आरोपों पर जब महापौर जगत बहादुर सिंह अन्नू ने पलटवार करते हुए कहा कि ‘कांग्रेस के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है’, तो इस पर राजनीति गरमा गई। पूर्व मंत्री और कांग्रेस विधायक लखन घनघोरिया ने महापौर के बयान पर तीखा हमला बोला है।
लखन घनघोरिया ने ने कहा कि ”पूरा शहर बदहाल है, सड़कें खस्ताहाल हैं और चारों तरफ भ्रष्टाचार का बोलबाला है। महापौर जी अगर दावा करते हैं कि सब ठीक है, तो वे शहर की सड़कों पर सीधा चलकर दिखा दें, मैं उन्हें सबसे बड़ा इनाम दे दूंगा। जबलपुर की जनता ने वोट देकर उन्हें महापौर बनाया था, लेकिन आज वे जनता की तकलीफों पर ध्यान देने के बजाय किसी और की गोद में जाकर बैठे हैं और उन्हीं की भाषा बोल रहे हैं।
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