शब्बीर अहमद, भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में सियासी घमासान के बीच बड़ी खबर सामने आई है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह से मिलने पहुंचे। दोनों नेताओं के बीच बंद कमरे में बातचीत हुई। उमंग सिंघार को दिग्विजय सिंह के विरोधी गुट का माना जाता है। कल पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक में दिग्विजय सिंह को लेकर सवाल उठे थे।

दिग्विजय सिंह से मुलाकात के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने नेताओं की बयानबाजी पर कहा कि पार्टी के अंदर सब अपनी बात कह सकते हैं, लेकिन अंदरूनी मंच पर…हमारे बीच में समन्वय बना हुआ है। पार्टी के अंदर लोकतंत्र व्यवस्था है पार्टी के अंदर सब अपनी बात कह सकते हैं। कोई भी नेता बोलने से पहले उस पर चर्चा होना चाहिए। इस बात को लेकर हम आगे ध्यान रखेंगे।

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कांग्रेस में कोई स्लीपर सेल नहीं- नेता प्रतिपक्ष

उमंग सिंघार ने यह भी कहा कि कांग्रेस के अंदर कोई स्लीपर सेल नहीं है। जो पॉलिटिकल अफेयर कमेटी की बैठक में सवाल उठे वो समय के साथ खत्म हो गए। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि दिग्विजय सिंह से मुलाकात को राजनीतिक एंगल से ना देखें। गौरतलब है कि हाल ही में दिल्ली में एक हाई-प्रोफाइल प्रेसवार्ता के दौरान मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मोहन सरकार पर करोड़ों रुपये के जमीन घोटाले का सनसनीखेज आरोप लगाया था। पटवारी ने दावा किया था कि उज्जैन में वीर भारत न्यास को 500 करोड़ रुपये की बेशकीमती सरकारी जमीन सिर्फ 1 रुपये की टोकन राशि पर खैरात में दे दी गई।

दिग्गी ने दिया था तीखा बयान

इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार को पूरी तरह क्लीन चिट दी। 27 जून 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए दिग्विजय ने अपनी ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के आरोपों को पूरी तरह खारिज करते हुए बेहद तीखा बयान दिया है।

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“मैं पूरी रिसर्च करके आया हूं, आरोप पूरी तरह गलत हैं”

दिग्विजय सिंह ने साफ शब्दों में कहा था कि उज्जैन की जमीन को लेकर लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने प्रेस के सामने ट्रस्ट के दस्तावेज दिखाते हुए कहा कि मैं इस मामले पर पूरी रिसर्च करके आया हूं यह आरोप पूर्णतः गलत है। सिंधिया की ओर से निर्मित बिल्डिंग को नियमों के तहत ही वीर भारत न्यास को दिया गया है। यह कोई प्राइवेट ट्रस्ट नहीं बल्कि एक शासकीय संस्था है। इसके बाद प्रदेश की सियासत गरमा गई थी।

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