अजय नीमा, उज्जैन। श्रावण मास का तीसरा सोमवार और नागपंचमी पर्व होने के कारण आज सुबह से ही शिव मंदिरों में भक्तों का तांता लगा हुआ है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। एमपी के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और भारतीय क्रिकेटर उमेश यादव ने भी बाबा महाकाल के दर्शन किए। प्रातः कालीन भस्म आरती में दर्शन लाभ लिए। इस दौरान बाबा महाकाल की भक्ति में लीन नजर आए।
मालवा निमाड़ के लिए सौभाग्य की बात
मध्य प्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और भारतीय क्रिकेट टीम के तेज गेंदबाज उमेश यादव सोमवार को उज्जैन पहुंचे। जहां दोनों ने ज्योतिर्लिंग भगवान महाकालेश्वर की प्रातः कालीन भस्म आरती में शामिल होकर दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। दर्शन के बाद कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मालवा निमाड़ वासियों के लिए सौभाग्य की बात है कि हमारे यहां दो ज्योतिर्लिंग ओंकारेश्वर और महाकालेश्वर भी हैं। सावन के महीने में दोनों मंदिरों में अपने आप में भाग्यशाली लोग ही जा सकते है। महाकाल की बड़ी कृपा है। हमेशा प्रार्थना करते है कि पूरे विश्व में शांति हो। प्रदेश और देश में प्रगति हो।
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दर्शन की अच्छी व्यवस्था- मंत्री कैलाश
वहीं कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि यहां दर्शन की अच्छी व्यवस्था है। मुझे लगता है कि पूरे सावन के महीने का आज सबसे भीड़ भरा सोमवार है। वहीं कथित वंदे मातरम के अपमान पर कहा कि सोनिया जी के देश प्रेम पर प्रश्नचिन्ह खड़ा हो गया है। जिस वंदे मातरम का गीत गाकर हमारे क्रांतिकारियों ने देश को आजादी दिलाई, उसका अपमान करना कही से भी उचित नहीं है, हम सब उसकी निंदा करते है।
क्रिकेटर उमेश यादव ने कही ये बात
भारतीय क्रिकेटर उमेश यादव ने कहा कि सावन सोमवार और नागपंचमी दोनों साथ में आए है, आज काफी अच्छा दिन है। मैं हर साल भस्म आरती के लिए आता है। बाबा महाकाल से अच्छा स्वास्थ्य, अच्छी जिंदगी की कामना की है। महाकाल मंदिर के पुजारी आशीष ने बताया कि आज तीसरा सावन सोमवार और नागपंचमी है। आज भक्तों को बाबा महाकाल के साथ-साथ नागचंद्रेश्वर महादेव के दर्शन का पुण्य भी प्राप्त हो रहा है।
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सावन सोमवार और नागपंचमी पर्व का अनूठा संयोग
श्रावण के तीसरे सोमवार के दिन महाकालेश्वर मंदिर में बाबा महाकाल की विशेष भस्मारती की गई। आज ही नागपंचमी पर्व होने के कारण दुर्लभ संयोग बना हुआ। यहां भस्मारती के पहले बाबा को कोटितीर्थ कुंड के जल से स्नान कराकर महा पंचामृत अभिषेक किया गया। जिसमें दूध, दही, घी, शहद व फलों के रस से बाबा का अभिषेक हुआ। जिसके बाद भांग और चन्दन से भोलेनाथ का आकर्षक श्रृंगार किया गया और भगवान को वस्त्र धारण कराये गए। तत्पशचात बाबा को भस्म चढाई गई। भस्मिभूत होने के बाद झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़े व शंखनाद के साथ बाबा की भस्मार्ती की गई।
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