मछली विभाग में खेल: मछलियां कम, ‘सब्सिडी’ के मगरमच्छ ज्यादा!
मध्य प्रदेश के मछली विभाग के तालाब में इन दिनों अजीब ही जलक्रीड़ा चल रही है, जहां बेचारी असली मछलियां तो किनारे हैं लेकिन सरकारी सब्सिडी की बड़ी मछलियों का शिकार धड़ल्ले से जारी है। सियासी गलियारों में चटखारे लेकर कहा जा रहा है कि विभाग ने योजनाओं का जो जाल गरीब मछुआरों के लिए बुना था, उसमें कुछ रसूखदार और अफसरों के चहेते शार्क बनकर मलाई काट रहे हैं। हालत यह है कि कागजों पर लाभार्थी कोई और है और अनुदान की थाली पर हाथ साफ कोई और कर रहा है। कुछ योजनाएं तो फाइलों के बंद कमरों में तैरकर सीधे खास लोगों की जेबों में गोता लगा चुकी है। अंदरखाने चर्चा है कि अगर कहीं सरकार ने इस तालाब की गहराई नापने के लिए ईमानदारी से कांटा डाला तो कई बड़े चेहरों का फंसना तय है, बशर्ते ये बड़ी मछलियां हर बार की तरह इस बार भी कानून का जाल काटकर रफूचक्कर न हो जाएं।
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नोटिस 22: जवाब ‘लापता’, कार्रवाई ‘इंतजार’ में!
राजधानी के सियासी गलियारों में इन दिनों एक ‘अनोखा’ नोटिस घूम रहा है, जिसने नेताओं की रातों की नींद भले न उड़ाई हो, लेकिन चर्चाओं का बाजार जरूर गर्म कर दिया है। कानाफूसी है कि ‘ऊपर’ से मिले आदेशों को हवा में उड़ाने वाले करीब 22 जिला अध्यक्षों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने के लिए नोटिस तो थमा दिया गया, पर मजाल है कि किसी एक का भी जवाब लौटकर आया हो! अब आलम यह है कि नोटिस जिलों की खाक छान रहा है और बेचारी ‘कार्रवाई’ किसी कोने में बैठी अपना वक्त आने का इंतजार कर रही है। अंदरखाने लोग चटखारे लेकर कह रहे हैं कि हुजूर, यहां अपनों को नोटिस थमाना तो बेहद आसान है, लेकिन उनसे जवाब मांगना और एक्शन लेना लोहे के चने चबाने जैसा है। अब देखना दिलचस्प होगा कि यह पूरा मामला हमेशा की तरह राजनीति के ‘ठंडे बस्ते’ में दफन होता है या फिर कभी इस खामोशी का हिसाब भी लिया जाएगा।
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मंत्री जी का ‘दिल्ली ड्रीम’: बैग पैक रह गया, हरी झंडी का इंतजार लंबा हो गया!
भोपाल के सत्ता के गलियारों में इन दिनों एक माननीय मंत्री जी की ‘बेचैनी’ सबसे हॉट टॉपिक बनी हुई है, जिन्होंने बहुत पहले ही दिल्ली जाने का टिकट पक्का मानकर अपने बोरिया-बिस्तर समेट लिए थे। भरोसा इतना पक्का था कि मानो बस ट्रेन छूटने ही वाली हो, लेकिन अफसोस… इंतजार है कि खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा! हवा हवाई दावों के बीच मंत्री जी ने दिल्ली के खूब चक्कर काटे, बड़े दिग्गजों के साथ ‘स्माइल प्लीज’ वाली तस्वीरें सोशल मीडिया पर चमकाईं ताकि भोपाल में भौकाल बना रहे कि ‘पकड़ बहुत मजबूत है’। मगर दांव उलटा पड़ गया; दिल्ली दरबार से ‘हरी झंडी’ मिलने के बजाय ‘लाल बत्ती’ दिखा दी गई और साफ कह दिया गया कि- “हुजूर, अभी भोपाल की जमीन ही नापिए!” नतीजा यह हुआ कि मंत्री जी के दिल्ली दौरे अचानक बंद हो गए। सितारे इतने गर्दिश में हैं कि अब एमपी में भी उनकी राय को पहले जैसा ‘भाव’ नहीं मिल रहा और खुद के विभाग पर से भी पकड़ ढीली होती दिख रही है; अब लोग चुटकी ले रहे हैं कि मंत्री जी न घर के रहे न ‘दरबार’ के!
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