सुरेश पाण्डेय, सिंगरौली। सिंगरौली के मोरबा जोन में पिछले हफ्ते से लोगों के घरों में चिपचिपा गंदा पानी पहुंच रहा है। 10 वार्डों में तकरीबन 5 हजार नलों के कनेक्शन हैं, जिसमें अनुमान है कि 25 हजार लोग पानी पीते हैं। आम जनता के काफी विरोध के बाद कई पार्षदों ने नगर निगम अधिकारियों से शिकायत की। जिसके बाद बिजुल नदी और वाटर ट्रीटमेंट प्लांट का मुआयना कर पानी की सेम्पलिंग कराई गई है, लेकिन रिपोर्ट आने के बाद ही क्लियर हो पाएगा कि पानी में कौन सा चिपचिपा पदार्थ मिक्स हो रहा है।
दरअसल, सिंगरौली नगर निगम में 45 वार्डों में जल सेंटर बनाकर रिहन्द डैम और मोरबा जोन में बिजुल नदी से पानी लेकर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया गया है। इसके बाद पानी को साफ सुथरा कर उसे पूरे शहर में पाइप लाइन के जरिए सप्लाई किया जाता है। तकरीबन 98 करोड़ की परियोजना में भारी लापरवाही की वजह से आये दिन लोगों के नलों में गंदा पानी आने की शिकायतें मिलती रहती हैं। अमृत जल के नाम पर निजी फर्म चंद्रा कंपनी पर नगर निगम के अधिकारी कुछ ज्यादा ही मेहरबान हैं, जिससे आये दिन किसी न किसी वार्ड में समस्या बनी रहती है।
ये भी पढ़ें: 2 महीने भी नहीं टिक पाया करोड़ों का निर्माणः इंदौर में पहली ही बारिश में बहा 2 करोड़ का स्टॉप डैम, कांग्रेस ने मंत्री सिलावट का मांगा इस्तीफा
आशंका जताई जा रही है बिजुल नदी में कोल वाशरी का कोयला और खदानों का मोबाइल युक्त पानी जा रहा है। गंदे पानी की सप्लाई से एक बार इंदौर की वाटर सप्लाई कांड की याद ताजा हो गई है। वहीं इस मामले में नगर निगम कार्यपालन यंत्री संतोष पांडेय ने कहा कि बारिश के जलते पानी थोड़ा मटमैला हो गया है। हालांकि इसे पूरी तरह से ट्रीटमेंट कर सप्लाई किया जा रहा है। वहीं पानी में कोयले की परत को लेकर कहा कि इसकी जानकारी नहीं है। मौके पर इंजीनियर को भेजा गया है।
ये भी पढ़ें: केन-बेतवा परियोजना: दसवें दिन भी जारी रहा चिता आंदोलन, आज आमरण अनशन के साथ जल सत्याग्रह भी

Follow the LALLURAM.COM MP channel on WhatsApp
https://whatsapp.com/channel/0029Va6fzuULSmbeNxuA9j0m

