मुजफ्फरनगर दंगों की 13वीं बरसी पर लखनऊ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में अखिलेश यादव की तस्वीर वाले विवादित पोस्टर लगाए गए. लखनऊ में पुलिस ने पोस्टर हटवा दिया, जबकि इन्हें लगाने वाले संगठन या व्यक्ति की पहचान स्पष्ट नहीं हो सकी है.

सतीश सिंह, लखनऊ. वर्ष 2013 में मुजफ्फरनगर में हुए सांप्रदायिक दंगों की बरसी पर 13 साल बाद लगाए गए विवादित होर्डिंग को लेकर सियासी पारा गरम हो गया है. लखनऊ के अलावा मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में लगाए गए पोस्टर में दंगों का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव की तस्वीर के साथ लिखा है, ‘न भूले थे, न भूले हैं, न भूलेंगे’.

लखनऊ के गोमतीनगर स्थित विपुल खंड-4 के सीएमएस चौराहे पर इस तरह का पोस्टर लगाया गया था, जिसे पुलिस ने हटवा दिया है. हालांकि, पोस्टर लगाने के पीछे किस संगठन या व्यक्ति का हाथ है, यह साफ नहीं हो सका है.

पोस्टर में दंगों के दौरान की तस्वीरें शामिल थीं.

दंगों के दौरान सपा सरकार

वर्ष 2013 में जब मुजफ्फरनगर में दंगे हुए थे, उस दौरान प्रदेश में अखिलेश यादव की सरकार थी. उस समय सपा सरकार पर दंगे रोकने में नाकाम रहने और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठे थे.

दंगों के दौरान सपा के वरिष्ठ नेताओं को संरक्षण दिए जाने के आरोपों के बीच अखिलेश यादव पर सैफई महोत्सव में शामिल होने को लेकर भी राजनीतिक आरोप लगाए गए थे.