मुजफ्फरपुर। शहर के आमगोला स्थित राजकीय मध्य विद्यालय में सोमवार को मिड-डे मील के दौरान हुए एक हादसे ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल की छत का प्लास्टर अचानक भरभरा कर गिर गया, जिसमें दो छात्राएं घायल हो गईं। इस घटना ने न केवल छात्रों को डरा दिया है बल्कि अभिभावकों का भरोसा भी डिगा दिया है।
सुरक्षा के खौफ में घटी उपस्थिति
इस हादसे के बाद मंगलवार को स्कूल में बच्चों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई। सामान्य दिनों में जहां 130-140 छात्र उपस्थिति दर्ज कराते थे वहीं घटना के अगले ही दिन उपस्थिति में करीब 25 प्रतिशत की कमी आई। कई अभिभावकों ने अपने बच्चों की जान जोखिम में डालना उचित नहीं समझा और उन्हें स्कूल नहीं भेजा।
एक कमरे और बरामदे में पढ़ाई का संकट
190 नामांकित छात्रों वाले इस विद्यालय में स्थिति बदतर हो गई है। पहले दो कमरों में कक्षाएं संचालित होती थी लेकिन अब हादसे के डर से एक कमरे को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। वर्तमान में एक मात्र कमरे और खुले बरामदे में बच्चों को बैठाया जा रहा है। शिक्षक भी हर पल यही डर लेकर पढ़ाने को मजबूर हैं कि कहीं फिर से कोई अनहोनी न हो जाए।
एक दशक से जर्जर भवन का दंश
यह विद्यालय पिछले एक दशक से अधिक समय से एक जर्जर सामुदायिक भवन में चल रहा है। भवन में मात्र तीन कमरे हैं, जिनमें से एक का इस्तेमाल कार्यालय और मिड-डे मील के लिए होता है। शिक्षकों का आरोप है कि भवन की जर्जर स्थिति के बारे में शिक्षा विभाग को कई बार लिखित और मौखिक सूचना दी गई, लेकिन स्थायी समाधान के नाम पर केवल आश्वासन मिले। पहले भी छत और रेलिंग से प्लास्टर गिरने की घटनाएं हो चुकी हैं, जिसे विभाग ने गंभीरता से नहीं लिया।
क्या बोले जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO)?
मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला शिक्षा पदाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जिले का कोई भी जर्जर विद्यालय अब उस भवन में संचालित नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सभी विद्यालय प्रभारी अपने भवनों की सुरक्षा का तत्काल आकलन करें। यदि भवन जर्जर है, तो उसे तुरंत सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट किया जाए। डीईओ ने कहा कि बच्चों की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
व्यवस्था पर उठते सवाल
शहर के बीचोबीच स्थित इस स्कूल की दुर्दशा यह बताने के लिए काफी है कि प्रशासन का ध्यान जमीनी हकीकत पर कितना कम है। सवाल यह है कि यदि विभाग को भवन के जर्जर होने की जानकारी पहले से थी तो किसी बड़े हादसे का इंतजार क्यों किया गया? फिलहाल छात्र और शिक्षक एक सुरक्षित छत मिलने के इंतजार में हैं ताकि बिना किसी डर के शिक्षा ग्रहण की जा सके।

