अहमदाबाद। गुजरात के देवभूमि द्वारका जिले में द्वारका और बेट द्वारका के मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध नागेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर इस सावन के पवित्र महीने में श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक माने जाने वाले इस मंदिर परिसर में स्थापित भगवान शिव की लगभग 25 मीटर (80 फीट) ऊंची भव्य और दर्शनीय मूर्ति देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के मुख्य आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।

पौराणिक कथा और दारुकावन का महत्व

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्राचीन काल में नागेश्वर क्षेत्र को ‘दारुकावन’ के नाम से जाना जाता था। कथाओं के अनुसार, दारुका नामक राक्षसी और उसके पति दारुक ने शिव भक्त सुप्रिया को यहां बंदी बना लिया था। सुप्रिया ने कारागार में निरंतर ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप किया, जिससे प्रसन्न होकर भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने राक्षसों का संहार कर भक्तों की रक्षा की। इसके बाद यहां स्वयंभू शिवलिंग प्रकट हुआ, जिसे आज नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में पूजा जाता है। इसके अतिरिक्त, इस स्थान का संबंध बालखिल्य ऋषियों की तपस्या से भी जोड़ा जाता है।

यात्री सुविधाओं का अभाव और स्थानीय मांग

हर साल लाखों की संख्या में श्रद्धालु नागेश्वर ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने और शिव भक्ति में लीन होने पहुंचते हैं। हालांकि, मंदिर परिसर के आसपास अब तक उचित यात्री व्यवस्थाएं विकसित नहीं हो पाई हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि इतने महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल पर ठहरने, स्वच्छ पेयजल और गुणवत्तापूर्ण खाने-पीने की उचित व्यवस्था न होने से उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि मंदिर क्षेत्र में जल्द से जल्द धर्मशालाएं, भोजन सुविधाएं और मूलभूत यात्री व्यवस्थाएं विकसित की जाएं।

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