वीरेंद्र कुमार/नालंदा। बिहार के नालंदा स्थित सदर अस्पताल में मुहर्रम के पवित्र अवसर पर स्वास्थ्य सेवाओं की लचर व्यवस्था की पोल खुल गई है। जिलाधिकारी के कड़े निर्देशों के बावजूद, अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से मरीजों की जान पर बन आई। औचक निरीक्षण के दौरान अस्पताल से 21 डॉक्टर बिना किसी पूर्व सूचना के अनुपस्थित पाए गए जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई नजर आई।
औचक निरीक्षण में खुली बड़ी लापरवाही
जिलाधिकारी के आदेश पर अपर समाहर्त्ता राजीव रंजन कुमार सिन्हा और उप विकास आयुक्त (DDC) रंजन कुमार चौधरी ने संयुक्त रूप से सदर अस्पताल का औचक निरीक्षण किया। जांच में जो तथ्य सामने आए वे चौंकाने वाले हैं। अस्पताल में कुल 48 चिकित्सकों की नियुक्ति है जिनमें से 21 डॉक्टर ड्यूटी से गायब थे। इतना ही नहीं महत्वपूर्ण ऑपरेशन थिएटर में भी तैनात चिकित्सक मौके पर मौजूद नहीं मिले।
मरीजों की जान से खिलवाड़
लापरवाही का आलम यह रहा कि गोली लगने से गंभीर रूप से घायल एक मरीज को इलाज के लिए अस्पताल लाया गया लेकिन सर्जन के उपलब्ध न होने के कारण उसे आनन-फानन में रेफर करना पड़ा। सबसे गंभीर बात यह है कि इस मरीज का कोई आधिकारिक रिकॉर्ड तक अस्पताल के रजिस्टर में दर्ज नहीं किया गया था। वार्डों में गंदगी का अंबार था मरीजों ने समय पर भोजन दवा उपलब्ध न होने और साफ-सफाई की कमी की शिकायत की। साथ ही एम्बुलेंस के संचालन का भी कोई व्यवस्थित रिकॉर्ड नहीं मिला।
DM की सख्ती और कार्रवाई के निर्देश
निरीक्षण दल द्वारा रोस्टर और उपस्थिति पंजी में भी भारी विसंगतियां पाई गईं। रिपोर्ट मिलने के बाद जिलाधिकारी ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है। उन्होंने सिविल सर्जन और अस्पताल प्रबंधन को कड़ी फटकार लगाते हुए स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है। जिलाधिकारी ने अनुपस्थित पाए गए सभी 21 चिकित्सकों और लापरवाह कर्मियों के विरुद्ध तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अस्पताल की व्यवस्था में तुरंत सुधार लाने और मरीजों के लिए सभी आवश्यक सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा गया है। यह घटना अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती है जहां मुहर्रम जैसे संवेदनशील मौके पर ड्यूटी के प्रति इतनी संवेदनहीनता बरती गई।

