दुर्गेश राजपूत, ​नर्मदापुरम। इसे कहते हैं धाकड़ पत्रकारिता का दमदार असर! ‘lalluram.com’ की खबर का ऐसा हड़कंप मचा कि डेढ़ साल से अलमारी में धूल खा रही 5700 पन्नों की जांच फाइल बाहर आ गई। 25 मई को जब शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह से सीधे तीखे सवाल दागे, तो प्रशासन में हड़कंप मच गया। नतीजा? पिपरिया के मंगलवारा थाने में तत्कालीन कंप्यूटर ऑपरेटर कमलेश अहिरवार के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हो चुका है।

मामला छात्रों के हक और शिक्षकों की गाढ़ी कमाई से जुड़ा है। बीईओ कार्यालय के तत्कालीन डेटा ऑपरेटर कमलेश अहिरवार ने अपने पद का ऐसा ‘दुरुपयोग’ किया कि साढ़े आठ लाख से ज्यादा की शासकीय राशि पर हाथ साफ कर दिया। विभागीय जांच में खुलासा हुआ कि इस शातिर ऑपरेटर ने छात्रवृत्ति और एरियर्स का कुल 9.48 लाख रुपया न सिर्फ अपने तीन अलग-अलग बैंक खातों में डाला, बल्कि अपनी पत्नी रेवा अहिरवार और भाई अनिल अहिरवार के खातों में भी धड़ल्ले से ट्रांसफर कर दिया।​

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करीब डेढ़ साल पहले जिला कोषालय (ट्रेजरी) ने इस तगड़े फर्जीवाड़े को पकड़ा था। नौकरी से निकाले जाने के बाद आरोपी ने डर के मारे 8,71,880 रुपये ब्याज सहित सरकारी खाते में वापस तो जमा कर दिए, लेकिन साहब! गुनाह तो गुनाह होता है। पैसे वापस मिलते ही अफसर ऐसे मेहरबान हुए कि डेढ़ साल तक पुलिस में रिपोर्ट ही दर्ज नहीं कराई। बीईओ और थाना प्रभारी इस ढिलाई के लिए एक-दूसरे पर ठीकरा फोड़ते रहे। ​लेकिन मीडिया की पैनी नजर से यह खेल छिप नहीं सका। खबर के बाद पुलिस हरकत में आई और आरोपी के खिलाफ धारा 318/4 और 316/4 के तहत केस ठोक दिया गया है। अब साहब, कानून का शिकंजा कस चुका है!

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