गुरुग्राम। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी शुक्रवार को गुरुग्राम यूनिवर्सिटी में आयोजित ‘GEN-H युवा उद्यमी चौपाल’ में युवाओं के बीच पहुंचे तो मंच औपचारिक भाषण के बजाय सीधे सवाल-जवाब का मंच बन गया। राजनीति में बिना विरासत के आगे बढ़ने से लेकर चुनावी हार, स्टार्टअप, नौकरी, परिवार, खेल, तकनीक, सरकारी योजनाओं और नशे तक युवाओं ने मुख्यमंत्री से कई बेबाक सवाल किए।

मुख्यमंत्री ने भी अपने राजनीतिक सफर और सरकार के फैसलों से जुड़े अनुभव साझा करते हुए युवाओं को लगातार प्रयास, धैर्य और लक्ष्य पर टिके रहने का संदेश दिया।

कार्यक्रम को 4,000 से अधिक संस्थानों में लाइव देखा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी राजनीतिक यात्रा में कोई ‘लिफ्ट’ नहीं थी, बल्कि सिर्फ सीढ़ियां थीं। कई बार अगली सीढ़ी दिखाई भी नहीं देती थी, लेकिन उन्होंने कदम बढ़ाना नहीं छोड़ा।

‘पीछे कोई नहीं था, फिर राजनीति में यहां तक कैसे पहुंचे?’

इस सवाल पर मुख्यमंत्री ने बताया कि राजनीति में आने के बाद शुरुआत में उन्हें खुद चुनाव लड़ने के बजाय दूसरे प्रत्याशी के लिए काम करने की जिम्मेदारी मिली। वे रात 2 बजे तक चुनाव प्रचार में जुटे रहते थे। वर्ष 2009 में जब उन्हें खुद चुनाव लड़ने का मौका मिला तो उनके पास पर्याप्त पैसे भी नहीं थे। लोगों के सहयोग से चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए।

उन्होंने कहा कि हार के अगले दिन ही वे दोबारा लोगों के बीच पहुंच गए। न कोई पद था और न अगले टिकट की गारंटी, लेकिन काम करने का संकल्प था। इसी मेहनत का परिणाम रहा कि 2014 में उन्होंने बड़े अंतर से चुनाव जीता।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 1996 में नरेंद्र मोदी हरियाणा भाजपा के प्रभारी थे और उन्होंने पंचकूला स्थित पार्टी कार्यालय में कंप्यूटर भिजवाया था। उस समय कंप्यूटर चलाते हुए उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि एक दिन मुख्यमंत्री बनेंगे। उनका कहना था कि युवाओं को नई तकनीक सीखने का लाभ जरूर मिलता है।

2009 की हार ने क्या सिखाया?

मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनाव हारने के बाद उन्होंने हार को अपनी पहचान नहीं बनने दिया। उनके लिए पद से ज्यादा ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना महत्वपूर्ण रही। उन्होंने कहा कि उस दौर में भ्रष्टाचार को लेकर देश की छवि खराब थी, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आज दुनिया भारत और भारतीयों को सम्मान की नजर से देखती है। उन्होंने कहा कि लोगों की सेवा की भावना, लगातार मेहनत और पार्टी की ओर से मिले अवसरों ने उन्हें विधायक से मंत्री, सांसद, प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री तक पहुंचाया।

मुख्यमंत्री का टाइम मैनेजमेंट कैसे चलता है?

मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके लिए कोई दिन पूरी तरह छुट्टी वाला नहीं होता। कार्यक्रम से एक रात पहले उनकी आखिरी बैठक रात करीब 1 बजे समाप्त हुई थी। इसके बावजूद सुबह गुरुग्राम में जनपरिवाद समिति की बैठक और फिर युवा चौपाल में शामिल होना था। उन्होंने युवाओं से कहा कि जीवन में समय का प्रबंधन बेहद जरूरी है। व्यस्तता के बीच प्राथमिकताएं तय करके ही बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।

आज के युवा के पास क्या है, जो आपके समय में नहीं था?

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज के युवा के पास एक क्लिक पर दुनिया भर की जानकारी उपलब्ध है। छोटे शहर का युवा भी निवेशक, मेंटर, ग्राहक और वैश्विक बाजार तक पहुंच बना सकता है। क्लाउड तकनीक, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया और एआई ने विचार को काम में बदलने की प्रक्रिया काफी आसान कर दी है।हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि उनके समय की सबसे बड़ी पूंजी धैर्य था। आज सोशल मीडिया के दौर में युवा जल्दी सफलता चाहते हैं, जबकि वास्तविक सफलता के लिए निरंतरता, विश्वसनीयता और धैर्य जरूरी है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि सोनीपत में बड़ा आईएमटी तैयार किया जा रहा है और युवाओं के लिए प्रदेश में 10 नई आईएमटी भी विकसित की जा रही हैं। नौकरी नहीं, अपना काम करना हो तो परिवार के विरोध में किसके साथ हैं?
मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि वे युवा के साथ हैं। उनका कहना था कि हर पीढ़ी को अपनी पसंद का रास्ता चुनने का अवसर मिलना चाहिए।

उन्होंने अपने परिवार का उदाहरण देते हुए बताया कि उन्होंने बेटे को मेडिकल क्षेत्र में जाने की सलाह दी थी, लेकिन उसने कानून की पढ़ाई करने का फैसला किया। बेटी भी अपनी पसंद के क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से कहा कि बच्चों पर अपनी इच्छा थोपने के बजाय उनकी बात सुननी चाहिए।

उन्होंने कहा कि हरियाणा में स्टार्टअप का माहौल तेजी से बदला है। उनके अनुसार, आज प्रदेश में करीब 12,500 स्टार्टअप और 17 यूनिकॉर्न हैं। सरकार ने स्टार्टअप नीति लागू की है, विश्वविद्यालयों को शोध के लिए 20-20 करोड़ रुपये का फंड दिया है और इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए हैं। मुद्रा योजना समेत विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवाओं को ऋण की सुविधा भी दी जा रही है।

गांव की 19 साल की बेटी के पास आइडिया है, पैसा नहीं तो सरकार क्या करेगी?

इस सवाल पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ऐसे प्रतिभाशाली युवाओं के आइडिया पर भरोसा करती है। केंद्र की ‘वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट’ योजना की तर्ज पर हरियाणा ने ‘वन ब्लॉक-वन प्रोडक्ट’ पहल शुरू की है।

विश्वविद्यालयों में इन्क्यूबेशन सेंटर बनाए गए हैं, जहां युवाओं के विचारों को तराशने के साथ उन्हें आगे बढ़ाने के लिए आर्थिक और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों को भी स्टार्टअप और युवाओं के साथ जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। आईटीआई को उद्योगों द्वारा अडॉप्ट कराया जा रहा है, ताकि युवाओं को रोजगार बाजार की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित किया जा सके।

खेल और खिलाड़ियों के लिए क्या कर रही सरकार?

मुख्यमंत्री ने कहा कि पदक भले ही पोडियम पर दिखाई देता है, लेकिन उसकी तैयारी वर्षों पहले गांव के अखाड़े, स्कूल के मैदान और सुबह की दौड़ से शुरू होती है। सरकार प्रतिभाओं की पहचान के लिए स्कूलों, खेल नर्सरियों, अखाड़ों और जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं पर जोर दे रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में हजारों खेल नर्सरियां हैं और खेल विभाग में 550 नए पद बनाए गए हैं। 8 से 14 वर्ष के खिलाड़ियों को 1,500 रुपये तथा 15 से 19 वर्ष के खिलाड़ियों को 2,000 रुपये मासिक छात्रवृत्ति दी जा रही है। 25 आवासीय खेल अकादमियों में खिलाड़ियों को 500 रुपये प्रतिदिन डाइट मनी का प्रावधान है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में करीब 18 हजार पदक विजेता खिलाड़ियों को 742 करोड़ रुपये के नकद पुरस्कार और इनाम दिए गए हैं।

आज मुख्यमंत्री के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के युवाओं को सुरक्षित और बेहतर माहौल देना सरकार की प्रमुख प्राथमिकता है। उन्होंने दावा किया कि 2014 से पहले नौकरियों में पैसे और सिफारिश का बोलबाला था, जबकि भाजपा सरकार ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि कई युवाओं ने उन्हें बताया कि पहले कई प्रयासों के बावजूद नौकरी नहीं मिली, लेकिन पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के कारण आखिरी अवसर में उन्हें सफलता मिली। इससे युवाओं और उनके परिवारों का सरकार पर विश्वास बढ़ा है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से नशे से दूर रहने की अपील करते हुए कहा कि यदि किसी चीज का नशा करना है तो वह अपने लक्ष्य को हासिल करने का होना चाहिए।

तकनीक, योजनाओं और भ्रष्टाचार पर भी जवाब

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकारी योजनाओं में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाया गया। लाभार्थियों के बैंक खाते खुलवाकर योजनाओं की राशि सीधे खातों में भेजी जा रही है। इससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई और लाभार्थियों को सीधे पैसा मिलने लगा।

पूरे संवाद में मुख्यमंत्री ने युवाओं से कहा कि सफलता के लिए केवल तेज शुरुआत काफी नहीं है। असफलता से सीखना, लगातार मेहनत करना, तकनीक को अपनाना, सही फीडबैक लेना और कठिन समय में दोबारा खड़े होना ही लंबी सफलता की असली कुंजी है।

‘GEN-H युवा उद्यमी चौपाल’ का संदेश यही रहा कि युवा अवसर का इंतजार करने के बजाय खुद अवसर पैदा करें और नौकरी तलाशने वाले नहीं, बल्कि दूसरों को रोजगार देने वाले बनने की दिशा में आगे बढ़ें।

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