NCERT Maratha Empire Map Controversy: राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी का लगता है विवादों से चोली-दामन साथ वाला रिश्ता जुड़ गया है। एनसीईआरटी अपने सिलेबस कुछ ऐसे बदलाव कर देता, जिससे बवाल शुरू हो जाता है। एनसीईआरटी की किताब में पाठ्यक्रम में बदलाव को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुका है। विवाद का ताजा मामला मराठा साम्राज्य के नक्शा को लेकर है। दरअसल एनसीईआरटी ने 8वीं की माजिक विज्ञान की किताब से मराठा साम्राज्य का नक्शा हटा दिया है। एनसीईआरटी के फैसले के खिलाफ मराठा शाही परिवार के वंशज बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंच गए हैं। जनहित याचिका (PIL) दाखिल कर इस नक्शे को वापस किताबों में शामिल करने की मांग की है। मामले पर बॉम्बे हाईकोर्ट में सुनवाई होनी है। छात्रों और इतिहास के जानकारों की नजर अब अदालत के फैसले पर टिकी है।
एनसीईआरटी की कक्षा 8वीं की सामाजिक विज्ञान की किताब से मराठा साम्राज्य का नक्शा हटाए जाने के फैसले के खिलाफ महाराष्ट्र के शाही परिवारों के वंशजों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बॉम्बे हाईकोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की है। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि नक्शा हटाने का फैसला बिना ठोस ऐतिहासिक साक्ष्य और विशेषज्ञों की सलाह के लिया गया।
दरअसल जुलाई 2025 में एनसीईआरटी ने कक्षा 8वीं की सोशल साइंस की किताब ‘एक्सप्लोरिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड पार्ट-I’ प्रकाशित की थी। इस किताब के पेज नंबर 71 पर ‘मराठा साम्राज्य’ का एक नक्शा (फिगर 3.11) दिया गया था। इसमें 1759 के समय के मराठा साम्राज्य विस्तार को दिखाया गया था। यह साम्राज्य दक्षिण में तंजावुर से लेकर उत्तर में पेशावर और पूर्व में कटक तक फैला हुआ था। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि राजस्थान के कुछ शाही परिवारों और राजनेताओं के विरोध के बाद एनसीईआरटी ने आनन-फानन में एक कमेटी बनाई।

अचानक क्यों हटाया नक्शा?
शाही वंशज पहुंचे कोर्ट इस फैसले के खिलाफ सतारा के शाही परिवार से जुड़े राजे मुधोजीराजे अजीतसिंहराव भोंसले और अन्य लोगों ने बॉम्बे हाई कोर्ट में याचिका दायर की है। उनका कहना है कि यह फैसला न केवल मनमाना है, बल्कि यह देश के करोड़ों नागरिकों के सटीक शिक्षा और सांस्कृतिक पहचान के अधिकार का उल्लंघन भी है। आरोप है कि इस हाई-पावर कमेटी ने बिना किसी ऐतिहासिक रिकॉर्ड की जांच किए और बिना किसी सार्वजनिक सूचना के, डिजिटल एडिशन से इस नक्शे को धीरे-धीरे हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी संस्करणों से हटा दिया।
याचिका में उठाए गए मुख्य बिंदु
- नक्शा हटाने का फैसला बिना किसी ठोस ऐतिहासिक साक्ष्य के लिया गया।
- कमेटी में मराठा इतिहास के विशेषज्ञ का पद खाली होने के बावजूद यह निर्णय लिया गया।
- महाराष्ट्र सरकार ने भी केंद्र और एनसीईआरटी को पत्र लिखकर इस नक्शे को दोबारा शामिल करने की मांग की है।
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