अभय मिश्रा, मऊगंज। NEET पेपर लीक की वजह से सुसाइड करने वाली छात्रा आकांक्षा के परिवार वालों से राहुल गांधी ने फोन पर बात की। कांग्रेस नेता ने पीड़ित परिवार को हर संभव मदद का आश्वासन दिया। इसके बाद उन्हें 3 लाख रुपए की आर्थिक सहायता भी दी।
‘मेरे लायक कुछ काम हो तो बताना’
लोकसभा नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने पीड़ित परिवार से कहा, मैंने आज आपकी बेटी की चिट्ठी पढ़ी तो मुझे बहुत दुख हुआ। इसलिए मैंने आपको फोन किया। अगर मेरे लायक कोई काम हो तो मैं कर सकता हूं। उस बेचारी की इसमें कोई गलती नहीं थी। उसने कुछ गलत नहीं किया बस पढ़ाई की थी। आपने कर्ज लिया। उसने चिट्ठी में लिखा कि उसे लगा कि उसने आपको बर्बाद कर दिया। मतलब बेचारी को कितना दुख और दर्द हुआ होगा। अगर मेरे लायक कुछ हो तो NSUI वालों को बता देना।’
3 लाख की आर्थिक सहायता की
इसके कुछ देर बाद राहुल गांधी ने परिवार वालों को ढाई लाख रुपए की सहायता पहुंचा दी। इसके कुछ देर बाद 50 हजार भी दिए। राहुल गांधी ने शोकाकुल परिवार से फोन पर चर्चा कर उन्हें ढांढस बंधाया तथा आकांक्षा को न्याय दिलाने और परिवार को हर संभव सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया। इस दौरान NSUI के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष मंजुल त्रिपाठी सहित कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
आत्म हत्या को बताया भ्रष्ट, टूटी हुई व्यवस्था
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी इस पर पोस्ट कर इसे आत्महत्या नहीं भ्रष्ट, टूटी हुई व्यवस्था की देन है। उन्होंने आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश और समाज की सेवा करना चाहती थी। आकांक्षा के पिता किसान हैं। बेटी के डॉक्टर बनने के सपने के लिए किसान क्रेडिट कार्ड पर ₹3 लाख का कर्ज़ लिया। और नागपुर में खुद कुक की नौकरी कर ली, ताकि बेटी वहां कोचिंग कर सके।
न सुधार, न न्याय
उन्होंने आगे कहा कि एक पिता ने जो कर सकता था, सब किया। फिर NEET पेपर लीक हुआ। परीक्षा रद्द हुई। उस अनिश्चितता में आकांक्षा हमें छोड़ कर चली गई। आकांक्षा की मौत आत्महत्या नहीं – मोदी जी की एक भ्रष्ट, टूटी हुई व्यवस्था की देन है। और धर्मेंद्र प्रधान जी? आज भी कुर्सी पर हैं। फिर वही कमेटी। वही ट्रांसफर। वही जाँच। न सुधार, न न्याय।

मोदी जी, कुर्सी स्थायी नहीं होती – आती-जाती रहती है। लेकिन आपने 12 वर्षों में शिक्षा व्यवस्था को जिस हद तक बर्बाद किया है, उसकी कीमत भारत की एक पूरी युवा पीढ़ी चुका रही है।

