राकेश चतुर्वेदी, भोपाल/ छतरपुर। नेपाल में आई भीषण त्रासदी ने हजारों परिवारों के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। ऐसे वक्त में भारत ने एक बार फिर पड़ोसी देश के साथ मानवीय रिश्ते की मिसाल पेश की है। इसी कड़ी में छतरपुर के बागेश्वर धाम की ओर से भी नेपाल के पीड़ित परिवारों के लिए मदद का हाथ बढ़ाया गया है। बागेश्वर धाम जन सेवा समिति के सहयोग से राहत सामग्री से भरे चार ट्रक नेपाल भेजे गए हैं।
राहत सामग्री में पीड़ित परिवारों की रोजमर्रा की जरूरतों का विशेष ध्यान रखा गया है। एक-एक बोरे में चावल, दाल, मसाले, नमक, सोयाबीन तेल, पानी, बिस्किट और नमकीन के साथ तिरपाल भी भेजे गए हैं। इसके अलावा थाली, गिलास और कटोरी जैसे जरूरी बर्तन भी राहत सामग्री में शामिल हैं। बागेश्वर धाम के प्रतिनिधि मनोज त्रिवेदी ने नेपाल पहुंचकर नेपाल शिष्य मंडल के साथ राहत सामग्री नेपाल सरकार के गृह मंत्रालय को सौंपी है।

बताया गया कि जिस वक्त नेपाल में त्रासदी की खबर सामने आई, उस समय पंडित धीरेंद्र शास्त्री जापान में थे। जानकारी मिलते ही उन्होंने नेपाल में रह रहे नेपाली नागरिकों और अपने शिष्य मंडल से संपर्क किया। शिष्य मंडल को बिना समय गंवाए सेवा कार्य में जुटने और जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाने के निर्देश दिए। इसके बाद बागेश्वर धाम में राहत सामग्री एकत्र की गई और चार ट्रकों के जरिए नेपाल भेजी गई।

पंडित धीरेंद्र शास्त्री ने भारत और नेपाल के रिश्तों को भावनाओं और आत्मीयता से जुड़ा रिश्ता बताया है। उनका कहना है कि दोनों देशों के बीच संबंध सिर्फ सीमाओं तक सीमित नहीं हैं बल्कि यह सदियों पुराना रोटी-बेटी और भावनाओं का रिश्ता है। ऐसे में पड़ोसी देश के संकट में उसके साथ खड़ा होना ही सच्ची मानवता है।
Gen Z को नई दिशा देने बागेश्वर धाम में तीन दिवसीय ‘आत्मशुद्धि ध्यान शक्ति शिविर’ शुरू
देश की युवा पीढ़ी यानी Gen Z को नई सोच, सकारात्मक ऊर्जा और आत्मचिंतन की दिशा देने के उद्देश्य से बागेश्वर धाम में आज से तीन दिवसीय ‘आत्मशुद्धि ध्यान शक्ति शिविर’ का शुभारंभ हुआ। शिविर में देशभर से करीब 750 सदस्य शामिल हुए हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस शिविर में युवाओं को योग, ध्यान, साधना और आत्मचिंतन के माध्यम से मानसिक रूप से सशक्त बनाने पर जोर दिया जा रहा है।
शिविर के पहले दिन की शुरुआत ब्रह्म मुहूर्त में योग साधना से हुई। साधना के बाद बागेश्वर सरकार ने शिविर में शामिल युवाओं को संबोधित किया और उन्हें शिविर के नियमों, उद्देश्य और आगामी तीन दिनों की गतिविधियों की जानकारी दी। बागेश्वर सरकार ने युवाओं से कहा कि यह शिविर केवल तीन दिनों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि अपने भीतर झांकने और जीवन को नए दृष्टिकोण से समझने का अवसर है।
इन तीन दिनों में मन और बुद्धि को सकारात्मक विचारों से जोड़ने, अनावश्यक मानसिक बोझ को कम करने और स्वयं के लिए समय निकालने का प्रयास किया जाएगा।उन्होंने कहा कि जीवन को जिस तरीके से हम अभी जी रहे हैं, जरूरी नहीं कि वही जीवन जीने का एकमात्र रास्ता हो। जीवन को देखने और समझने के कई नए पहलू हो सकते हैं, जिन्हें आत्मचिंतन और साधना के माध्यम से जाना जा सकता है।

युवाओं को देश का भविष्य बताते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में देश और दुनिया का नेतृत्व आज की युवा पीढ़ी ही करेगी। इसलिए युवाओं के भीतर केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि विवेक, सकारात्मक सोच, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता का विकास भी जरूरी है।
बागेश्वर सरकार ने भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते प्रभाव का जिक्र करते हुए कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और आने वाले समय में AI मानव जीवन और काम करने के तरीकों में बड़ा बदलाव ला सकती है। उन्होंने कहा कि AI को केवल रोजगार पर संकट के रूप में देखने के बजाय इसे मानव जीवन को बेहतर बनाने के अवसर के रूप में भी समझना चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि तकनीक इंसान के कई नियमित और दोहराव वाले काम अपने हाथ में लेती है, तो मनुष्य के पास अपने लिए समय निकालने, तनाव कम करने, रचनात्मक सोच विकसित करने और समाज के लिए कुछ नया करने का अवसर बढ़ सकता है।
बागेश्वर सरकार ने कहा कि जब मशीनें बहुत से काम संभालेंगी, तब मानव के सामने सबसे बड़ा सवाल यह होगा कि वह अपने समय और बुद्धि का इस्तेमाल किस तरह करता है। यही समय मनुष्यता, आनंद, आत्मचिंतन और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण हो सकता है।
इसी सोच के साथ बागेश्वर धाम में आयोजित यह तीन दिवसीय आत्मशुद्धि ध्यान शक्ति शिविर Gen Z को तकनीक के साथ संतुलन बनाते हुए मानसिक शांति, सकारात्मक सोच और नेतृत्व की नई दिशा देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।
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