शिखिल ब्यौहार, भोपाल। मध्य प्रदेश में राजनीतिक नियुक्तियां पाने वाले अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए सत्ता-संगठन की नई गाइडलाइन जारी की गई है। हर छह महीने में परफॉर्मेंस रिपोर्ट देनी होगी। रिपोर्ट में कामों का विवरण देना होगा। पार्टी गाइडलाइन का उल्लंघन करने पर नपना भी तय है। वहीं कांग्रेस ने इसे दिखावे की राजनीति बताया है।
एमपी में राजनीतिक नियुक्तियां पाने वाले अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के लिए सत्ता-संगठन की नई गाइडलाइन जारी की गई है। अब हर छह माह में परफॉर्मेंस रिपोर्ट देना होगा। रिपोर्ट में कामों का विवरण बताना होगा। संबंधित मॉडल प्राधिकरण बोर्ड और आयोग में किए गए सुधारो को भी बताना होगा। वहीं पार्टी गाइडलाइन का उल्लंघन करने पर नपना भी तय है। इसके साथ ही गाइडलाइन में कम खर्च करने पर भी जोर दिया गया है। सत्ता और संगठन के बीच सामंजस का भी संदेश है। बेफिजूल की बयानबाजी से भी बचने की नसीहत दी गई है। आपको बता दें कि 30 से ज्यादा राजनीतिक नियुक्तियां अभी भी होल्ड पर है।
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नई गाइडलाइन को लेकर सियासत
वहीं नई गाइडलाइन को लेकर सियासत भी शुरू हो गई है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व मंत्री पीसी शर्मा ने कहा कि बीजेपी में रिपोर्ट का नहीं कोई खेल, यहां भ्रष्टाचार का खेला है। भाजपा में सिर्फ दो पावर सेंटर दोनों दिल्ली में बैठे है। सिर्फ दिखावे के लिए रिपोर्ट जैसी पहल करते हैं। रिपोर्ट काहे की सिर्फ इवेंट मैनेजमेंट कर रहे हैं, ध्यान बांटने वाली राजनीति है।
बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता शाहवर खान ने कहा कि बीजेपी में सुचिता की राजनीति है। जन भावना के तहत काम हो, इसलिए हर 6 माह में रिपोर्ट मांगी जाएगी। रिपोर्ट के आधार पर सुधार होगा। जनता को बेहतर से बेहतर सुविधाएं और संबंधित मॉडल प्राधिकरण का लाभ मिल सके। इसके लिए कवायद की जा रही है। कांग्रेस के पास मुद्दा नहीं है। कांग्रेस बेमुद्दे की राजनीति करती है, उसके बयानों पर अब जनता को भी भरोसा नहीं है। कांग्रेस हल्की हो गई है।

