दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) और दिल्ली मेट्रो लेडीज वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन (DLWO) ने दिल्ली सरकार के राज्य शहरी आजीविका मिशन (SULM) तथा टेक्सटाइल री-साइक्लिंग से जुड़ी संस्थाओं क्लॉथ्स बॉक्स फाउंडेशन और रेस्पन के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए। इस अवसर पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता भी मौजूद रहीं। इस साझेदारी के तहत राजधानी में ‘ओल्ड क्लॉथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट’ (Old Clothes Donation Project) शुरू किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य लोगों के पुराने और इस्तेमाल किए गए कपड़ों को सीधे लैंडफिल में जाने से रोकना, टेक्सटाइल कचरे को कम करना और री-साइक्लिंग व अपसाइक्लिंग के जरिए सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार पर्यावरण संरक्षण, प्रभावी कचरा प्रबंधन और महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि ‘ओल्ड क्लॉथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट’ केवल टेक्सटाइल कचरे को कम करने की पहल नहीं है, बल्कि यह नागरिकों को स्वच्छ, हरित और टिकाऊ दिल्ली के निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करने का भी एक महत्वपूर्ण माध्यम बनेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि पुराने कपड़ों के पुनः उपयोग, री-साइक्लिंग और अपसाइक्लिंग को बढ़ावा देकर प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण किया जा सकेगा और लैंडफिल पर बढ़ते कचरे का दबाव भी कम होगा। उन्होंने लोगों से इस अभियान से जुड़कर पर्यावरण संरक्षण में योगदान देने की अपील की। इस अवसर पर दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC) के मैनेजिंग डायरेक्टर डॉ. विकास कुमार, दिल्ली मेट्रो लेडीज वेलफेयर ऑर्गेनाइजेशन (DLWO), राज्य शहरी आजीविका मिशन (SULM), क्लॉथ्स बॉक्स फाउंडेशन और रेस्पन के पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
ओल्ड क्लॉथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट के तहत लोगों के घरों में रखे अनुपयोगी और पुराने कपड़ों को एकत्र करने के लिए दिल्ली मेट्रो के 10 स्टेशनों पर ‘अर्पण’ नाम से विशेष संग्रह केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, री-साइक्लिंग और अपसाइक्लिंग से तैयार उत्पादों की बिक्री के लिए भी मेट्रो परिसरों में विशेष कियोस्क (बूथ) लगाए जाएंगे, जिससे सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा मिलेगा। परियोजना के पहले चरण में अगले कुछ दिनों के भीतर शाहदरा, डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल, मालवीय नगर, हौज खास, द्वारका, मोहन एस्टेट, लाजपत नगर, मयूर विहार फेज-1, पंजाबी बाग वेस्ट और शालीमार बाग मेट्रो स्टेशनों पर ‘अर्पण’ केंद्र शुरू किए जाएंगे। इन केंद्रों पर नागरिक सुबह 7 बजे से शाम 7 बजे तक अपने पुराने और उपयोग योग्य कपड़े आसानी से दान कर सकेंगे।
री-साइक्लिंग और अपसाइक्लिंग से तैयार होंगे नए उत्पाद
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि ‘ओल्ड क्लॉथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट’ के तहत एकत्र किए गए कपड़ों को उनकी स्थिति और उपयोगिता के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। पहली श्रेणी में ऐसे कपड़े होंगे, जिनका उपयोग स्वयं सहायता समूह (SHGs) बैग, सजावटी सामान और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार करने के लिए करेंगे। इससे महिलाओं को रोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। उन्होंने बताया कि दूसरी श्रेणी में पूरी तरह अनुपयोगी कपड़ों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें री-साइक्लिंग के माध्यम से नए उत्पादों और कच्चे माल में बदला जाएगा। वहीं, पूजा-पाठ में उपयोग होने वाले कपड़ों और अन्य धार्मिक सामग्री का भी सम्मानजनक तरीके से पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण किया जाएगा, ताकि लोगों की धार्मिक भावनाओं का पूरा सम्मान बना रहे।
हर तरह के कचरे के लिए तैयार होंगे वैज्ञानिक समाधान
मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार केवल टेक्सटाइल कचरे तक सीमित नहीं है, बल्कि खंडित मूर्तियों, प्लास्टिक कचरे और अन्य प्रकार के अपशिष्ट पदार्थों के निस्तारण के लिए भी अलग-अलग वैज्ञानिक और पर्यावरण अनुकूल समाधान विकसित कर रही है। उनका मानना है कि यदि हर तरह के कचरे के लिए व्यवस्थित और वैज्ञानिक प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए, तो दिल्ली को कचरा प्रबंधन की बड़ी चुनौतियों से काफी हद तक राहत मिल सकती है। रेखा गुप्ता ने बताया कि फिलहाल राजधानी में 10 ‘अर्पण’ केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद इन केंद्रों का विस्तार चरणबद्ध तरीके से दिल्ली के सभी क्षेत्रों में किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक लोग इस अभियान से जुड़ सकें और स्वच्छ व टिकाऊ दिल्ली के निर्माण में अपनी भागीदारी निभा सकें।
अर्पण केंद्रों की खासियत
‘अर्पण’ परियोजना के तहत स्थापित किए जा रहे संग्रह केंद्रों का संचालन दिल्ली सरकार के राज्य शहरी आजीविका मिशन (SULM) से जुड़ी स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिलाओं के जिम्मे होगा। इन महिलाओं को कपड़ों की अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे इस पहल के जरिए आर्थिक रूप से सशक्त और आत्मनिर्भर बन सकें। दान में प्राप्त कपड़ों का एक हिस्सा महिलाओं को अपसाइक्लिंग के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इन कपड़ों से नए और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे, जिससे उन्हें आय का अतिरिक्त स्रोत भी मिलेगा। इस अभियान में ‘क्लोथ्स बॉक्स फाउंडेशन’ और ‘रेस्पन’ साझेदार संस्थाओं के रूप में कपड़ों की छंटाई (सेग्रीगेशन), रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग की पूरी प्रक्रिया का संचालन करेंगी। वहीं, इन केंद्रों पर रीसाइक्लिंग और अपसाइक्लिंग से तैयार उत्पादों की बिक्री भी की जाएगी। इससे न केवल कपड़ों के पुनः उपयोग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि सर्कुलर इकोनॉमी मॉडल को भी मजबूती मिलेगी।
QR कोड स्कैन कर होगा डिजिटल रजिस्ट्रेशन
‘ओल्ड क्लॉथ्स डोनेशन प्रोजेक्ट’ के तहत नागरिकों के लिए कपड़े दान करने की प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल और आसान बनाया गया है। मेट्रो स्टेशनों पर लगाए जाने वाले ‘अर्पण’ कियोस्क पर लोग QR कोड स्कैन कर अपने कपड़ों के दान का डिजिटल रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे। इसके लिए उन्हें अपना नाम, मोबाइल नंबर और दान किए गए कपड़ों का विवरण दर्ज करना होगा, जिसके बाद उन्हें तुरंत डिजिटल प्रमाणपत्र भी प्रदान किया जाएगा। दान किए गए कपड़ों को उनकी स्थिति और उपयोगिता के अनुसार अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाएगा। जो कपड़े दोबारा इस्तेमाल किए जा सकते हैं, उन्हें अपसाइक्लिंग के जरिए बैग, परिधान और अन्य उपयोगी उत्पादों में बदला जाएगा। वहीं, पूरी तरह अनुपयोगी कपड़ों को री-साइक्लिंग के माध्यम से नए धागे, कपड़े और अन्य टेक्सटाइल उत्पाद बनाने में इस्तेमाल किया जाएगा।
इस परियोजना के तहत प्राप्त होने वाले प्रत्येक दान को संबंधित मेट्रो स्टेशन के साथ डिजिटल रूप से मैप किया जाएगा, जिससे रियल-टाइम ट्रैकिंग और रिपोर्टिंग सुनिश्चित हो सकेगी। इसके लिए एक सेंट्रलाइज्ड एडमिन डैशबोर्ड भी विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से अधिकृत अधिकारी सभी ‘अर्पण’ केंद्रों पर प्राप्त दान, उसकी प्रोसेसिंग और वितरण की निगरानी कर सकेंगे। दिल्ली सरकार का कहना है कि यह डिजिटल व्यवस्था परियोजना में पारदर्शिता, जवाबदेही और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करेगी। साथ ही, नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण, कचरा प्रबंधन और सामाजिक सहभागिता से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
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