सतीश सिंह, लखनऊ. जातिगत जनगणना के मौजूदा प्रारूप पर सवाल उठाते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पिछड़ा वर्ग विभाग के चेयरमैन डॉ. अनिल जयहिन्द ने कहा कि यह प्रारूप दोषपूर्ण है और इससे साफ होता है कि मोदी सरकार की नीयत साफ नहीं है. उन्होंने मौजूदा प्रश्नावली रद्द करने की मांग की है.

डॉ. जयहिंद ने कहा कि तेलंगाना और बिहार में अपनाई गई पद्धति के अनुसार जातियों की प्रमाणित सूची (ड्रॉपडाउन सूची) के आधार पर नई प्रश्नावली तैयार की जाए. उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों, विशेषज्ञों और आम जनता से विचार-विमर्श के बाद ही नई प्रश्नावली बनाई जाए, ताकि हर जाति और समुदाय की सही संख्या सामने आए और जनगणना सामाजिक न्याय के लिए उपयोगी साबित हो. उन्होंने बताया कि आगामी जनगणना के लिए अधिसूचित 40 प्रश्नों में सवाल नंबर 10 खुला (ओपन-एंडेड) रखा गया है. इसमें कोई पूर्वनिर्धारित सूची नहीं है. नागरिक जो नाम बताएगा, गणनाकार उसे हूबहू लिख लेगा. इससे एक ही जाति के अलग-अलग नाम, उपनाम और स्पेलिंग के कारण कई हिस्से हो सकते हैं. नतीजा यह होगा कि ओबीसी-ईबीसी की वास्तविक संख्या और उनकी वंचना अदृश्य हो सकती है.

इसे भी पढ़ें : महीने में कई बार अयोध्या आते हैं, लेकिन… CM योगी के दौरे से पहले सांसद अवधेश प्रसाद का तीखा हमला, चंदा चोरी से लेकर कई मुद्दों पर घेरा

डॉ. जयहिन्द ने कहा कि गलत तरीके से होने वाली जाति जनगणना की सबसे बड़ी कीमत ओबीसी, ईबीसी और वंचित वर्ग चुकाएंगे. सही आंकड़ों के बिना जितनी आबादी, उतना हक का सिद्धांत कमजोर पड़ेगा. आरक्षण की समीक्षा, शिक्षा, रोजगार, कल्याण योजनाओं और संस्थानों में हिस्सेदारी का आकलन भी प्रभावित होगा. उन्होंने कहा कि देश में लगभग 4,200 जातियां हैं और केंद्र व राज्यों के पास इनकी सूचियां पहले से उपलब्ध हैं. फिर भी ड्रॉपडाउन सूची का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा. एक जून की बैठक का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय मंत्रालय के अधिकारियों ने राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग की ओबीसी सूची साझा करने की इच्छा जताई थी, लेकिन बाद में प्रक्रिया में इसे शामिल नहीं किया गया.

सरकार शुरू से जातिगत जनगणना की मांग

कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार शुरू से ही जातिगत जनगणना के खिलाफ रही है. 2021 में सुप्रीम कोर्ट में दायर हलफनामे में सरकार ने खुद माना था कि ड्रॉपडाउन सूची जरूरी है. राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने कई बार प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर आपत्ति जताई थी. 2023-24 के चुनावों में मांग उठाने के बाद 30 अप्रैल 2025 को सरकार को 2027 से जातिगत जनगणना का ऐलान करना पड़ा, लेकिन प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं दिख रही. उन्होंने चेतावनी दी कि पिछड़ों, दलितों और शोषितों के हक की लड़ाई से पार्टी पीछे नहीं हटेगी.