दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत के बाद राजधानी में प्रशासनिक एजेंसियां एक्शन मोड में आ गई हैं। हादसे के बाद दिल्ली सरकार, उपराज्यपाल और नगर निगम स्तर पर इमारतों की सुरक्षा को लेकर जांच अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए हैं। MCD ने सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (बिल्डिंग) को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली सभी इमारतों की जांच करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को जांच पूरी कर 10 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है। इस अभियान का मकसद जर्जर और असुरक्षित इमारतों की पहचान कर समय रहते जरूरी कार्रवाई करना है। MCD के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में दिल्ली में एक व्यापक सर्वे कराया गया था। इस दौरान कुल 27 लाख 84 हजार 286 इमारतों का सर्वे किया गया। इनमें से सिर्फ 19 इमारतों को खतरनाक पाया गया था।

पूरी दिल्ली में इमारतों की होगी जांच, MCD ने दिए आदेश

अधिकारियों के मुताबिक, MCD ने सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (बिल्डिंग) को अपने अधिकार क्षेत्र में आने वाली इमारतों की सघन जांच करने के निर्देश दिए हैं। अधिकारियों को 10 सितंबर तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपनी होगी। जांच के दौरान जुटाई गई जानकारी को एक हलफनामे में शामिल किया जाएगा। MCD की ओर से यह हलफनामा 10 दिन के भीतर दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल किया जाएगा। आदेश के मुताबिक, हर जोन में संबंधित एडिशनल कमिश्नर जांच और रिपोर्ट जमा करने की पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे। इस जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कहीं किसी इलाके में ऐसी इमारतें तो नहीं हैं, जिनकी हालत जर्जर है या जो लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती हैं।

PG वाले इलाकों में इमारतों का होगा स्ट्रक्चरल ऑडिट

वहीं, लोक निवास के मुताबिक, दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने PG वाले इलाकों में सभी इमारतों का एक सप्ताह के भीतर स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने के निर्देश दिए हैं। इस संबंध में मुख्य सचिव को आदेश जारी कर दिए गए हैं। LG ने मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के साथ सरकार और MCD के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ हाई लेवल बैठक भी की। बैठक में सत्य निकेतन हादसे के बाद इमारतों की सुरक्षा और PG में रहने वाले छात्रों की स्थिति को लेकर चर्चा की गई।

छात्रों से संपर्क करेंगी प्रशासनिक समितियां

लोक निवास के मुताबिक, जिलाधिकारी, पुलिस उपायुक्त और MCD के उपायुक्त की समितियां PG में रहने वाले छात्रों से सीधे संपर्क करेंगी। ये समितियां छात्रों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी लेंगी और उनकी सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को समझेंगी। इसके अलावा, PG में रहने वाले छात्रों का पूरा डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इसका उद्देश्य PG में रहने वाले छात्रों की संख्या, उनके आवास और संबंधित व्यवस्थाओं की जानकारी प्रशासन के पास उपलब्ध कराना है।

कोर्ट ने दो को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा

पुलिस ने सोमवार रात तीनों आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया। सुनवाई के दौरान जस्टिस भव्य खराल ने उर्मिला गुप्ता और हरिराम गुप्ता को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वहीं, महेश गुप्ता को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। पुलिस अब मामले में इमारत के प्रबंधन और उससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है। जांच का फोकस यह पता लगाने पर है कि इमारत के निर्माण, रखरखाव और वहां चल रहे PG के संचालन में किन लोगों की जिम्मेदारी थी। पुलिस ने हादसे के मामले में PG संचालकों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर की तलाश भी शुरू कर दी है। अधिकारियों के मुताबिक, इन लोगों की भूमिका की जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि इमारत में चल रहे निर्माण या अन्य कामों के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।

सत्य निकेतन इमारत हादसे के बाद दिल्ली में PG और किराये की इमारतों की जांच को लेकर प्रशासन सक्रिय है। हालांकि, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू ने स्पष्ट किया है कि बिना सोचे-समझे बड़े पैमाने पर सीलिंग की कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। उनका कहना है कि इससे लोगों में पैनिक फैल सकता है और बड़ी संख्या में छात्र बेघर हो सकते हैं। LG ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सबसे पहले उन इलाकों में जांच की जाए, जहां बड़ी संख्या में छात्र PG में रह रहे हैं। खासतौर पर ऐसे मकान मालिकों की जांच करने को कहा गया है, जिन्होंने प्रथम दृष्टया इमारत की ऊंचाई और फ्लोर से जुड़े नियमों का उल्लंघन किया है।

PG दिशानिर्देशों की होगी समीक्षा

उपराज्यपाल ने एक पोस्ट के जरिए कहा कि शहरी विकास मंत्री संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक कमिटी की निगरानी करेंगे। यह कमिटी मौजूदा PG दिशानिर्देशों की समीक्षा करेगी और जरूरत के मुताबिक उनमें सुधार को लेकर सुझाव देगी। इसके साथ ही छात्रों के लिए वैकल्पिक आवास की व्यवस्था तलाशने पर भी जोर दिया गया है। इसके लिए विश्वविद्यालयों, MCD और DDA के माध्यम से छात्रों के रहने की वैकल्पिक व्यवस्था खोजी जाएगी, ताकि असुरक्षित इमारतों पर कार्रवाई होने की स्थिति में छात्रों के सामने रहने की समस्या न खड़ी हो।

CM ने भी दिए सभी PG की गहन जांच के आदेश

वहीं, यूनीवार्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन हादसे के बाद घटनास्थल के आसपास मौजूद सभी संवेदनशील भवनों और PG की गहन जांच के निर्देश दिए हैं। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ऐसी इमारतों की सुरक्षा को लेकर किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए, जहां बड़ी संख्या में लोग रहते हैं या सार्वजनिक गतिविधियां संचालित होती हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार MCD के साथ मिलकर ऐसी नीति लाएगी, जिसके तहत सार्वजनिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल होने वाली हर इमारत का समय-समय पर स्ट्रक्चरल ऑडिट और भवन सुरक्षा प्रमाणन अनिवार्य किया जाएगा।

PG, स्कूल और नर्सिंग होम भी दायरे में

प्रस्तावित व्यवस्था के दायरे में सिर्फ PG ही नहीं, बल्कि नर्सिंग होम, स्कूल और अन्य संस्थानों के संचालन में इस्तेमाल होने वाली इमारतें भी शामिल होंगी। इन भवनों की संरचनात्मक सुरक्षा की नियमित जांच की जाएगी, ताकि किसी संभावित खतरे की पहचान समय रहते की जा सके। CM रेखा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा सुनिश्चित किए बिना किसी भी इमारत में सार्वजनिक गतिविधियों की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार का जोर ऐसी व्यवस्था बनाने पर है, जिसमें भवनों की सुरक्षा की नियमित निगरानी हो और खामियां मिलने पर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें।

पूरी दिल्ली में अवैध पांच मंजिला इमारतों को सील करने के आदेश

नई दिल्ली। सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने से 7 लोगों की मौत के बाद दिल्ली सरकार ने राजधानी में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। यूनीवार्ता की रिपोर्ट के मुताबिक, मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने पूरी दिल्ली में अवैध पांच मंजिला इमारतों को तत्काल सील करने के आदेश दिए हैं। CM ने अधिकारियों को घटनास्थल के आसपास मौजूद PG और अन्य भवनों की भी गहन जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान यदि किसी भवन में सुरक्षा मानकों का उल्लंघन पाया जाता है तो उसे तत्काल सील कर सख्त कार्रवाई की जाएगी।

असुरक्षित PG में रहने को मजबूर नहीं होंगे छात्र

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि किसी भी छात्र को असुरक्षित PG में रहने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ेगा। उन्होंने बताया कि सत्य निकेतन की इमारत से निकाले गए छात्रों के लिए कॉलेज हॉस्टल में रहने की व्यवस्था की गई है। सरकार का कहना है कि भवनों की सुरक्षा जांच के दौरान छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी। इसके साथ ही जरूरत पड़ने पर असुरक्षित इमारतों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट करने की व्यवस्था भी की जाएगी।

जहां हादसा हुआ, वहां करीब 300 मकान, 170 में PG

सत्य निकेतन इलाके में करीब 300 मकान हैं, जिनमें से लगभग 170 मकानों में PG संचालित हो रहे हैं। सत्य निकेतन को 1965 से 1970 के बीच झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए बसाया गया था। इसके बाद 1970 के दशक में साउथ कैंपस शुरू होने और आसपास कॉलेजों के विस्तार के साथ यहां बड़ी संख्या में छात्र रहने लगे। बताया जाता है कि इलाके के कई मूल आवंटी अपने मकान बेच चुके हैं। इसके बाद इन मकानों का इस्तेमाल PG और किराये के आवास के रूप में होने लगा। आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली में करीब 75 लाख घरों में से केवल 1.75 लाख इमारतों के पास स्वीकृत बिल्डिंग लेआउट प्लान हैं। ऐसे में सत्य निकेतन हादसे के बाद राजधानी की पुरानी और अतिरिक्त मंजिलों वाली इमारतों की सुरक्षा को लेकर व्यापक जांच की जरूरत पर जोर दिया जा रहा है।

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