Rajasthan News: राजस्थान के बाड़मेर स्थित पचपदरा रिफाइनरी में लगी भीषण आग ने न केवल करोड़ों का नुकसान किया है, बल्कि प्रदेश की राजनीति का पारा भी हाई कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित दौरे से ठीक पहले हुई इस घटना ने सुरक्षा मानकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां कांग्रेस इसे सरकार की लापरवाही बता रही है, वहीं सत्ता पक्ष ने पलटवार करते हुए इसे राजनीति न करने की नसीहत दी है।

मंत्री जोगाराम पटेल का कांग्रेस पर पलटवार
दरअसल, मामले की गंभीरता को देखते हुए कैबिनेट मंत्री जोगाराम पटेल ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने साफ लहजे में कहा कि ऐसे संवेदनशील समय में कांग्रेस को टीका-टिप्पणी से बचना चाहिए। पटेल ने स्पष्ट किया कि टेंडर देना राज्य के हाथ में नहीं, बल्कि केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय का काम है। उन्होंने उन आरोपों को खारिज कर दिया जिनमें कहा जा रहा था कि कम अनुभवी कंपनियों को काम दिया गया है। मंत्री ने बताया कि उद्घाटन का कार्यक्रम फिलहाल टल गया है, लेकिन जल्द ही नई तारीख आएगी और पीएम मोदी की अगुवाई में भव्य आयोजन होगा।
गहलोत और जूली ने उठाए चुभते सवाल
गौरतलब है कि पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस घटना को जनता की चिंता से जोड़ते हुए पूछा कि आखिर पीएम के आने से एक दिन पहले ऐसी अनहोनी कैसे हो गई? वहीं, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तीखा हमला बोलते हुए कहा कि भाजपा ने इस प्रोजेक्ट को अटका कर रखा और अब सुरक्षा से खिलवाड़ हो रहा है। पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने भी इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
रिफाइनरी के अंदर आखिर चल क्या रहा है?
सूत्रों ने बताया कि आग लगने के बाद से रिफाइनरी परिसर में सन्नाटा पसरा है और जांच टीमें तकनीकी खामियों को ढूंढ रही हैं। कांग्रेस का आरोप है कि राज बदलने के बाद काम की गति धीमी हुई और सुरक्षा मानकों को ताक पर रख दिया गया।
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