पटना हाईकोर्ट ने सरप्लस (अतिरिक्त) शिक्षकों के स्थानांतरण और पदस्थापन के मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत के इस आदेश के बाद राज्य में सरप्लस शिक्षकों के आधार पर किए जा रहे या प्रस्तावित सभी तबादलों पर फिलहाल रोक लग गई है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक सभी शिक्षक अपने वर्तमान कार्यस्थल पर ही बने रहेंगे।
मामले की पृष्ठभूमि और याचिकाकर्ताओं का पक्ष
यह पूरा मामला नरेंद्र कुमार नंद एवं अन्य शिक्षकों द्वारा दायर की गई याचिका पर आधारित है। पटना हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति अजीत कुमार की एकलपीठ ने इस मामले की सुनवाई की। अदालत में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ललित किशोर और अधिवक्ता मृत्युंजय कुमार ने पक्ष रखा।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने कोर्ट का ध्यान सरप्लस शिक्षकों की पहचान और उनके स्थानांतरण की प्रक्रिया में आ रही भारी विसंगतियों की ओर आकर्षित किया। उन्होंने दलील दी कि जिस प्रकार से स्थानांतरण की प्रक्रिया अपनाई जा रही है, उसमें पारदर्शिता और नियमों का पालन नहीं हो रहा है। इसके कारण राज्य भर के हजारों शिक्षक मानसिक रूप से प्रताड़ित हो रहे हैं और उन्हें अनावश्यक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
राज्य सरकार को नोटिस और चार सप्ताह का समय
अदालत ने याचिकाकर्ताओं के वकीलों की दलीलों को गंभीरता से सुना। इसके बाद, पटना हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को इस मामले में एक विस्तृत जवाबी हलफनामा दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि सरप्लस निर्धारण और स्थानांतरण के नियमों में इतनी कमियां और विसंगतियां क्यों हैं। इस मामले की अगली सुनवाई अब से ठीक चार सप्ताह के बाद तय की गई है।
स्टेटस को (यथास्थिति) का आदेश: शिक्षकों को राहत
दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले में ‘स्टेटस को’ (यथास्थिति) बनाए रखने का आदेश दिया। इसका सीधा मतलब यह है कि जिन शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया सरप्लस के आधार पर चल रही थी, उन्हें फिलहाल नए स्थान पर योगदान देने की कोई आवश्यकता नहीं है। जब तक अदालत का अगला आदेश नहीं आ जाता, तब तक सभी शिक्षक अपने पुराने और वर्तमान स्कूलों में ही अपनी सेवाएं देते रहेंगे।
इस आदेश से फिलहाल उन शिक्षकों को बड़ी राहत मिली है, जिन्हें अचानक से दूर-दराज के स्कूलों में भेजे जाने की प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा था। अब सबकी निगाहें चार सप्ताह बाद होने वाली अगली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां राज्य सरकार अपना पक्ष रखेगी और उसके बाद ही स्पष्ट हो पाएगा कि तबादलों की यह प्रक्रिया आगे कैसे बढ़ेगी।


