कुंदन कुमार, पटना। शिक्षक दिवस के पवित्र अवसर पर बिहार की राजधानी पटना की सड़कों पर एक हैरान करने वाली और राज्य की शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाली तस्वीर देखने को मिली। शिक्षक दिवस के दिन जहां एक तरफ देश भर में शिक्षकों के सम्मान में कार्यक्रम आयोजित हो रहे थे, वहीं बिहार में वित्तरहित और अतिथि शिक्षक अपनी बदहाल स्थिति के खिलाफ सड़कों पर उतरने को मजबूर थे। राज्य सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए इन शिक्षकों ने अनोखा और प्रतीकात्मक प्रदर्शन किया, जिसमें उनके हाथ में भीख मांगने वाला कटोरा और गले में कफन लिपटा हुआ था।

कफन पदयात्रा और जेपी गोलंबर पर पुलिस से तीखी झड़प
बिहार कांग्रेस के तत्वावधान में गांधी मैदान से एक आक्रोशपूर्ण ‘कफन पदयात्रा’ निकाली गई, जिसका उद्देश्य राज्य की बदहाल शिक्षा व्यवस्था और शिक्षकों की स्थायी सेवा की मांग को सरकार तक पहुंचाना था। यह पदयात्रा गांधी मैदान से शुरू होकर विधानसभा की ओर बढ़ रही थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पटना पुलिस ने जेपी गोलंबर के पास भारी बैरिकेडिंग कर शिक्षकों और कांग्रेस नेताओं को रोक लिया। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग तोड़ने और आगे बढ़ने की कोशिश की, जिसके चलते पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच गहमागहमी का माहौल बन गया। इस प्रदर्शन में बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और सेवा दल के चेयरमैन डॉ. संजय यादव समेत कई प्रमुख नेता शिक्षकों के समर्थन में सड़कों पर उतरे।
चार दशकों से उपेक्षित वित्तरहित शिक्षकों का दर्द
बिहार में वित्तरहित शिक्षा व्यवस्था का इतिहास चार दशकों से भी अधिक पुराना है। वर्ष 1982 से चली आ रही इस व्यवस्था के तहत राज्य में बड़ी संख्या में विद्यालय और महाविद्यालय अस्तित्व में आए, जिन्होंने पीढ़ियों का भविष्य संवारा। विडंबना यह है कि दशकों बीत जाने के बाद भी इन संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों और कर्मचारियों की सेवा आज तक स्थायी नहीं हो सकी है। सरकार की उदासीनता के कारण इन शिक्षकों की आर्थिक स्थिति इतनी दयनीय हो चुकी है कि उनकी तुलना भीख मांगने वाले एक भिखारी जैसी हो गई है, जिन्हें अपने हक के लिए कटोरा लेकर सड़कों पर उतरना पड़ रहा है।
भविष्य गढ़ने वालों के खुद के भविष्य की कोई गारंटी नहीं
प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम ने सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि इस कफन यात्रा का मुख्य उद्देश्य समाज और सत्ता में बैठे लोगों को यह आईना दिखाना है कि जो शिक्षक पूरी जिंदगी छात्रों का भविष्य संवारने में अपना जीवन समर्पित कर देते हैं, आज उनके अपने और उनके परिवार के भविष्य की कोई गारंटी नहीं बची है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार को हर हाल में इन शिक्षकों की सुधि लेनी होगी और उनके लिए सम्मानजनक वेतनमान तथा स्थायी सेवा नीति लागू करनी होगी।
आगे की रणनीति: शिक्षा सत्याग्रह और हस्ताक्षर अभियान
कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने 5 सितंबर तक इन वित्तरहित और अतिथि शिक्षकों की मांगें पूरी नहीं कीं, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। इसके अगले चरण में 6 सितंबर से गर्दनीबाग में ‘शिक्षा सत्याग्रह अभियान’ का आगाज किया जाएगा, जो तब तक अनिश्चितकालीन रूप से जारी रहेगा जब तक सरकार इन शिक्षकों की सभी मांगों को स्वीकार नहीं कर लेती। इसके साथ ही सरकार पर दबाव बनाने के लिए पूरे राज्य में एक व्यापक हस्ताक्षर अभियान भी चलाया जाएगा।



